झोलाछाप ने एक और ग्रामीण की जिंदगी छीन ली। गुस्साए लोगों ने चौकी का घेराव किया। मृतक का शव रखकर झोलाछाप को दुकान से नहीं उठने दिया। देर रात तक मामले में समझौते के प्रयास चल रहे थे।
फरह के नगला तांगर निवासी राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जो (60) सोमवार दोपहर ओल स्थित झोलाछाप रुमाल सिंह चाहर की दुकान पर दवा लेने आए। परिवारीजनों ने बताया कि झोलाछाप ने दवा दी और इंजेक्शन लगाया। इसके बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। परिवारीजनों के हाथ-पांव फूल गए। जब तक वो पीड़ित को कहीं और ले जाते मृत्यु हो गई। परिवारीजनों ने गांव में सूचना दी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण आ गए। उन्होंने ओल पुलिस चौकी को घेर लिया। इधर चौकी पर ग्रामीणों की संख्या देख पुलिस के माथे पर भी पसीना आ गया।
आनन-फानन में सीओ रिफाइनरी अनुपम सिंह, फरह कोतवाल अवधेश त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव में दो दर्जन से अधिक झोलाछाप लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। इन्हें स्वास्थ्य विभाग का पूरा संरक्षण है। देर रात तक पुलिस चौकी पर अफसर और ग्रामीणों का जमावड़ा लगा था।
झोलाछापों पर मेहरबान है स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग झोलाछापों पर इस कदर मेहरबान है कि कोई अधिकारी इनके ठिकानों की तरफ झांकता भी नहीं है। अभी हाल ही में उच्च न्यायालय ने झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई का ब्यौरा मांगा तो अफसर बगलें झांकने लगे थे। जनसूचना अधिकार अधिनियम में बताया गया कि बीते चार सालों में मात्र छह झोलाछापों के खिलाफ ही एफआईआर हुई है।
इंजेक्शन लगने के बाद ग्रामीण के मौत की सूचना मिली है। मंगलवार को मुख्यालय से अफसरों की टीम मामले की हकीकत जानने के बाद रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
डा. विवेक मिश्रा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मथुरा