मथुरा। राज्य सरकार से जमीन अधिग्रहण संबंधी गाइडलाइन मिलते ही बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ठाकुर बांकेबिहारी कॉरिडोर आकार लेने लगेगा। योगी सरकार ने इस परियोजना के पहले चरण के लिए सोमवार को बजट में 150 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की घोषणा की है। इससे कॉरिडोर के पक्ष में आवाज उठाने वाले लोगों में खुशी की लहर है। हालांकि अभी न तो शासन ने गाइडलाइन भेजी है और न ही प्रोजेक्ट के लिए कोई कमेटी गठित की गई है। ऐसे में बजट में राशि का प्रावधान किए जाने के बावजूद काम शुरू होने का इंतजार करने पड़ेगा।
कॉरिडोर बिहारी जी मंदिर के सामने 5.65 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है, जो जमीन की भौगोलिक स्थिति के चलते दो हिस्सों में होगा। इसे विद्यापीठ और परिक्रमा मार्ग से जोड़ा गया है। प्रस्तावित कॉरिडोर में बिहारी जी के भक्तों की प्रत्येक सुविधा का ध्यान रखा गया है। इसमें एक साथ 10 हजार लोगों की मौजूदगी हो सकेगी। इस पर करीब 505 करोड़ रुपये के खर्च का आकलन किया गया है।
कॉरिडोर के लिए मंदिर के आसपास स्थित 276 से अधिक दुकानों और मकानों का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 149 आवासीय, 66 व्यावसायिक, 57 मिश्रित भवन हैं। जमीन अधिग्रहण और निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई होनी है। गाइडलाइन में ही तय होगा कि आखिर जमीन अधिग्रहण किस दर पर किया जाएगा। जिन लोगों की जमीन ली जाएगी, उनको मुआवजे के साथ ही कॉरिडोर में कुछ दिया जाएगा या नहीं।
प्रशासन 300 निर्माणों के सर्वे और कीमत के आकलन में जुटा
बांके बिहारी कॉरिडोर के लिए प्रशासन जमीन अधिग्रहण की दिशा में विचार कर रहा है। करीब 300 निर्माणों को हटाने के लिए चिन्हीकरण पहले ही चुका है। फिलहाल प्रशासन पुख्ता सर्वे कराने और जमीन की एवज में दिए जाने वाले मुआवजे की कीमत तय करने में जुटा है। इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। उसी अनुसार जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि जारी होगी। बांके बिहारी कॉरिडोर के लिए 5.65 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। स्थानीय लोगों को जमीन देने के लिए मनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रशासन आगे की दशा में कदम बढ़ाएगा।
सरकार ने श्री बांके बिहारी कॉरिडोर के लिए 150 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। मगर, अभी तक कोई गाइडलाइन स्थानीय प्रशासन को प्राप्त नहीं हुई है। गाइडलाइन आते ही आगे ही काम शुरू करेंगे।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी