वृंदावन। ठा. श्रीबांकेबिहारी की नगरी विधवा माताओं के आश्रय स्थलों में देश भर में सबसे बड़ी मानी जाती है। यहां विधवा माताओं को आश्रय देने वाले सभी छोटे बड़े आश्रमों की संख्या एक दर्जन से अधिक है। इन्हीं में से एक आश्रम सबसे अनूठा है। इसमें विधवा माताओं, कोविड-19 की त्रासदी में अनाथ हुए बच्चों के पालन और उनकी शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
परिक्रमा मार्ग पर गोपाल खार के राजपुर बांगर में श्री भजन कुटी लक्ष्मीनाथ सेवा संस्थान द्वारा आश्रम का संचालन किया जा रहा है। संस्थान के माध्यम से निराश्रित विधवा माताओं की देखरेख की जा रही है। परिसर में ही विशाल गोशाला और अस्पताल का संचालन भी किया जाता है। इसके अलावा कोविड-19 की त्रासदी में माता-पिता को खो चुके 30 बच्चों को सीबीएससी स्तर के स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है। आश्रम में सभी के रहने के लिए अलग-अलग स्थान बनाए गए हैं।
विधवा माताओं के लिए सभी को एक-एक कमरा दिया गया है। वहीं बाल-बालिकाओं के लिए बाल आश्रय स्थल बनाया गया है। जिसे बच्चों के अनुकूल तैयार कराया गया है। आश्रम में संचालित की जा रही राधाजी की रसोई में सभी के लिए भोजन तैयार किया जाता है। पूरे आश्रम की देखरेख के लिए 20 लोगों की टीम है। इसका संचालन कर रहे प्रबंधक महेन्द्र शर्मा ने बताया कि संस्थान की सचिव ज्योति सिंह महिलाओं और बच्चियों का ध्यान रखती हैं। आश्रम का प्रबंधन पिंटू ठाकुर संभाल रहे हैं।
नियम से होती है ठाकुरजी की सेवा
संस्थान के अध्यक्ष बालकृष्ण देवाचार्य महाराज ने बताया कि इस स्थान का जिक्र ग्रंथों में भी किया गया है। यहां गौढ़ीय संप्रदाय के चैतन्य महाप्रभु की भजन स्थली हुआ करती थी। यहां एक गुफा भी है। यहां हर दिन सुबह सबेरे आश्रम में विराजमान ठाकुरजी की आराधना की जाती है। आश्रम में तैयार भोजन आश्रित माताओं, बच्चों के अलावा बड़ी संख्या बाहर से आए साधु और अन्य लोग भी पाते हैं। आश्रम के अन्न क्षेत्र में कोई भी आ सकता है।