वृंदावन। भगवान जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक जल यात्रा महोत्सव का आयोजन हुआ। ज्येष्ठ मास की प्रचंड गर्मी से भगवान को राहत दिलाने के उद्देश्य से ठाकुरजी को एकादश फल और 108 जल के घड़ों से सहस्रधारा स्नान कराया गया।
मंदिर के सेवायत स्वामी ज्ञानप्रकाश महाराज ने बताया कि यह सेवा हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर होती है। मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को हल्का ज्वर हो जाता है और वे अस्वस्थ हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए भगवान को 15 दिनों तक विश्राम दिया जाता है जिस दौरान वे भक्तों को दर्शन नहीं देते।
स्वामी जी ने बताया कि इस विश्राम काल में भगवान को जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक औषधियों और विशेष आहार से स्वस्थ किया जाता है। यह सेवा एक मां की तरह भगवान की देखभाल का प्रतीक है। जल यात्रा के बाद भगवान को शयन कक्ष में विश्राम के लिए ले जाया गया, जहां विशेष नियमों और उपचार के साथ उनकी सेवा होगी।