ठाकुरजी भाव से प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भक्त भावसेवा के जरिए अपने आराध्य से लाड़ लड़ाते हैं। आत्मीय भाव से ओतप्रोत होकर ही ठाकुरजी केे श्रीविग्रहों की सेवा और पूजा की जाती है।
इस क्रम में श्रावण मास शुरू होते ही भाव सेवा के अनुरूप ठाकुरजी को बरसात से बचाने के लिए उन्हें छतरी लगाई जा रही है। नगर की दुकानों पर बिक रहीं ठाकुरजी के लिए हर प्रकार की छतरी आकर्षण का केंद्र बन गईं हैं।
दुकानदार कमल खंडेलवाल, गोविंद अग्रवाल और राधावल्लभ ने बताया कि यह भक्त का भाव है कि वह ठाकुरजी को बरसात के मौसम में छतरी ओढ़ाना चाहता है। इसके लिए बाजार भी तैयार है। आज 40 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की छतरियां बाजार में उपलब्ध हैं।