वृंदावन। परिक्रमा मार्ग स्थित जगन्नाथ मंदिर में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को भव्य जलयात्रा उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र और बहन सुभद्रा को ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी और अत्यधिक ताप से शीतलता व राहत प्रदान करने के लिए पारंपरिक रूप से दिव्य स्नान कराया जाएगा। जलयात्रा उत्सव के दौरान गर्भगृह में विराजमान ठाकुर जी का 108 कलशों से विशेष महा अभिषेक संपन्न होगा।
मंदिर के महंत स्वामी ज्ञानप्रकाश ने बताया कि ज्येष्ठ मास के तपते मौसम में भगवान को शीतलता पहुंचाने के उद्देश्य से इस उत्सव की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस वर्ष यह पवित्र जलयात्रा 29 जून को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। महा अभिषेक के लिए विशेष रूप से 108 कलशों की व्यवस्था की गई है। इन कलशों में देश की सात प्रमुख और पवित्र नदियों का जल, विभिन्न प्रकार के ऋतु फलों का ताजा रस एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से युक्त जल भरा जाएगा।
इसी वैदिक और औषधीय जल से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा का मंत्रोच्चारण के बीच अभिषेक किया जाएगा। जल से निरंतर भारी स्नान करने के कारण ठाकुर जी अत्यधिक शीतल हो जाते हैं, जिससे वे अस्वस्थ हो जाएंगे और उन्हें तेज ज्वर आ जाएगा। बीमार होने के कारण ठाकुरजी तुरंत एकांतवास में चले जाएंगे। इस अस्वस्थता की अवधि के दौरान मंदिर की पूरी दिनचर्या और व्यवस्था बदल जाती है। भगवान के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनके नियमित भोग-प्रसाद में भी बड़ा बदलाव किया जाएगा।
इस काल में ठाकुर जी को उनका सबसे प्रिय महाप्रसाद अर्पित नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर उन्हें केवल हल्का और सूखा भोग ही निवेदित किया जाएगा। हालांकि इस पूरे समय के दौरान मंदिर के गर्भगृह के भीतर ठाकुर जी की गुप्त सेवा-पूजा और उपचार की पद्धतियां निरंतर जारी रहेंगी। ज्वर के कारण एकांतवास में जाने की वजह से ठाकुर जी कई दिनों तक अपने भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। जलयात्रा यानी 29 जून के बाद से भगवान के पट आम दर्शनार्थियों के लिए पूरी तरह बंद हो जाएंगे। एकांतवास के दौरान भगवान के मानसिक स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का विशेष आयोजन किया जाएगा। इस बार मंदिर में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक सप्त दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा।