दर्शनार्थियों की संख्या के लिहाज से करोड़पति ठाकुर बांकेबिहारी महाराज नगदी के लिहाज से अरबपति हो गए हैं। इसमें भक्तों द्वारा चढ़ाए गए आभूषण और अन्य उपहार शामिल नहीं हैं। इस तरह अचल संपति की बात करें तो इसका मूल्य भी अरबों में है। यह जानकारी गुरुवार को मंदिर प्रबंध समिति के निवर्तमान उपाध्यक्ष ने सार्वजनिक की।
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर प्रबंध समिति के निवर्तमान उपाध्यक्ष घनश्याम गोस्वामी ने मीडिया से बातचीत में अपने तीन साल के कार्यकाल का ब्योरा दिया। बता दें, गुरुवार उनकी समिति के कार्यकाल का अंतिम दिन था। शुक्रवार से नई प्रबंध समिति कार्यभार ग्रहण करेगी। उन्होंने बताया कि ठाकुर बांकेबिहारी के लिए लाड़-प्यार इतना है कि भक्तों ने इन तीन वर्षों में गर्भगृह के मेहराब, दरवाजे और मंदिर के मुख्य गेट को कई किलोग्राम चांदी से मढ़वा दिया।
निवर्तमान उपाध्यक्ष घनश्याम गोस्वामी ने कमेटी की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने बताया कि प्रबंध कमेटी ने एक जुलाई 2013 को चार्ज लेने के साथ ही श्रद्धालुओं के समक्ष सबसे बड़ी समस्या मंदिर परिसर में लगी बेरिकेडिंग को हटवाया। पहली बार अष्टयाम प्रहर की भोग सेवा शुरू की गई। वृद्धा पेंशन को 5000 से 10000 और गरीब विद्यार्थियों के शिक्षा शुल्क को 2000 से बढ़ाकर 5000 किया। मंदिर प्रबंधन ने अपने खर्च पर 33 केवीए का सब स्टेशन स्थापित कराया। भगवान गणेश, हनुमान मंदिर, सती मंदिर और मंदिर रसोई का जीर्णोद्धार कराया गया। समय-समय पर चिकित्सा शिविर भी लगवाए गए।
तीन साल में 67 से 112 करोड़ रुपये
प्रबंध समिति के निवर्तमान उपाध्यक्ष घनश्याम गोस्वामी के मुताबिक ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के नाम से मंदिर के बैंक खातों में जमाराशि 13 जुलाई 2013 को 67 करोड़ थी। यह 28 जून 2016 को बढ़कर 112 करोड़ हो गई। इसमें चढ़ावे के रूप में ठाकुरजी को मिले आभूषण और अन्यउपहार शामिल नहीं हैं।