जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज के सेवायत आराध्य की सेवार्थ सर्वस्व समर्पण करने से पीछे नहीं रहते हैं। कई बार मंदिर पर आये संकटकाल में सेवायतों ने तन, मन और धन सहित शहादत तक दी है। 158 वर्ष पहले 13 वर्ष में 70 हजार रुपये की लागत से ठाकुर बांके बिहारी मंदिर बनकर तैयार हुआ था।
मंदिर के सेवायत आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ब्रिटिश शासनकाल में फतेहपुर, मैनपुरी, बुलंदशहर एवं मथुरा के जिला कलेक्टर रहे फैड्रिक सेलमोन ग्राउस (वर्ष 1836-93) द्वारा लिखित पुस्तक ‘मथुरा: ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर’ में श्रीबांकेबिहारी मंदिर के इतिहास का उल्लेख किया है। अपनी पुस्तक में लिखा है कि 1864 में बिहारीजी के तेज तर्रार पढ़े-लिखे विद्वान सेवायतों ने 70 हजार रुपयों में 13 वर्षों की मेहनत के बाद बिहारीजी का मौजूदा मंदिर बनाया था।
यूपी सरकार दो सप्ताह में हाईकोर्ट में दाखिल करेगी अपनी योजना
इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में दर्शनार्थियों की सुरक्षा, उनके उचित रखरखाव की योजना बनाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की गई। प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार के समक्ष 10 सितंबर को रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। सरकार इस रिपोर्ट का परीक्षण कर रही है। कोर्ट से दो सप्ताह का समय कार्य योजना को प्रस्तुत करने के लिए मांग की गई। कोर्ट ने दो सप्ताह बाद 28 सितंबर को इस जनहित याचिका पर फिर से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।
मामले में मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल एवं न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ अनंत शर्मा व अन्य की तरफ से दाखिल इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पिछली तारीख पर भगदड़ तथा इसमें हुई मौत का उल्लेख करते हुए सरकार से तीर्थयात्री व दर्शनार्थियों की सुरक्षा की प्रस्तावित कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।