मथुरा। जिले के पांच गांवों को 76 करोड़ की परफॉर्मेंस ग्रांट से चमकाने के लिए शासन से हरी झंडी मिल गई। कामों की सूची तैयार है, डीपीआर भी बन गई लेकिन काम शुरू नहीं हुए। प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए ग्रांट की रकम से होने वाले कामों को अपने कार्यकाल में कराना चाहते हैं। प्रधानों का आरोप है कि डीपीआरओ मनमानी कर कामों के टेंडर नहीं खोल रहे हैं। प्रधानों ने इस मामले को लेकर डीएम और सीडीओ से भी मुलाकात की थी।
जनपद के पांच गांवों का चयन परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए किया गया। इसमें छाता का पैगांव, बलदेव का ततरौता, मांट का नगला हिमायूं (देह), गोवर्धन का अडींग तथा तोष का चयन हुआ था। इनके ग्राम प्रधान ने कामों की सूची तैयार कराकर डीपीआर बनवा दी। शासन से स्वीकृति भी मिल गई। प्रदेश के अन्य गांवों में काम शुरू भी हो गए लेकिन मथुरा में विभाग की लेटलतीफी के कारण कोई भी काम प्रारंभ नहीं हो सका है। उधर, 25 दिसंबर को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ग्राम प्रधान चाहते हैं कि उनके कार्यकाल मेें ही काम प्रारंभ हो जाए लेकिन विभाग द्वारा काम के टेंडर नहीं डाले जा रहे हैं।
दो दिन पूर्व पांचों गांवों के प्रधानों ने इस संबंध में डीएम सर्वज्ञराम मिश्र तथा सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ से मुलाकात की और कामों के लिए टेंडर डालने का आग्रह किया। जब प्रधान अधिकारियों के कहने पर डीपीआरओ प्रीतम सिंह के पास गए तो वहां से निराश होकर लौटना पड़ा।
ग्राम प्रधान ततरौता डॉ. एमपी सिंह, पैगांव प्रधान रमन देवी, अडींग प्रधान स्नेहलता, नगला हिमायूं प्रधान श्री निवास व तोष के प्रधान गोविंदा का आरोप है कि डीपीआरओ 21 दिन की निविदा खोलना चाहते हैं ताकि उनका कार्यकाल खत्म हो जाए फिर वह काम शुरू कराएं और अपनी मनमानी कर सकें। जबकि डीपीआरओ प्रीतम सिंह का कहना है कि उन्होंने ग्राम प्रधानों से कहा है कि वह पहले छोटे स्तर के कामों की शुरुआत ग्राम पंचायत की बैठक कर टेंडर कर करें। दो लाख तक के काम प्रधान ग्राम पंचायत स्तर से करा सकते हैं, जबकि 50 लाख तक के काम डीपीआरओ ही कराएंगे।