मथुरा। कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए नियुक्त किए जा रहे सफाईकर्मियों को लेकर निगम के कुछ अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही खींचतान को नगर आयुक्त ने खत्म कर दिया है। उन्होंने अब तक तैयार की गई सूची की बात को अफवाह बताया है तथा कहा है कि ऐसी कोई सूची निगम में तैयार ही नहीं हुई। बिना गजट के सफाईकर्मियों की कोई भी भर्ती नहीं की जाएगी। साथ ही भर्ती में ध्यान रखा जाएगा कि जिनका कोई रिश्तेदार निगम में है उसको भर्ती में मौका नहीं मिलेगा। अमर उजाला में यह मामला प्रकाशित होने के बाद पार्षदों और सफाई कर्मचारी संघ ने शासन स्तर पर इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद नगर आयुक्त ने स्थिति स्पष्ट की है।
जमुनापार स्थित नगर निगम का कूड़ा निस्तारण प्लांट का एक कंपनी द्वारा संचालन किया जा रहा था। करीब दो माह पूर्व कंपनी ने काम बंद कर दिया। इस कार्य की जिम्मेदारी निगम ने ही ले ली थी। निगम द्वारा आवश्यकता के अनुसार यहां पर चालक तथा अन्य स्टाफ के लिए बैकलॉग के सफाईकर्मियों से काम लेना प्रारंभ कर दिया लेकिन कूड़ा निस्तारण के लिए सफाईकर्मियों की आवश्यकता थी। निगम द्वारा शुरुआत में करीब 42 सफाईकर्मियों को लिया जाना था।
इन सफाईकर्मियों के लिए निगम में घमासान मचा हुआ था। जनप्रतिनिधियों ने इसी मामले को लेकर भर्ती में प्रमुख भूमिका निभा रहे सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी की भी धुनाई कर डाली थी। अमर उजाला में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए, जिसमें पार्षद नीलम गोयल, उमेश भारद्वाज तथा सफाई कर्मचारी संघ ने इसकी शिकायत नगर आयुक्त के अलावा शासन से भी की थी।
नगर आयुक्त रविंद्र कुमार मांदड़ ने उक्त अधिकारी से यह जिम्मेदारी हटा दी है। बताया कि सफाईकर्मचारी बनने वाले लोग भ्रम में ना रहें। अभी तक कोई सूची तैयार नहीं की गई है। हम भर्ती के लिए सफाईकर्मचारियों के नाम डूडा के माध्यम से ही लेंगे। नगर आयुक्त ने बताया कि वह स्वयं जांच करेंगे कि भर्ती होने वाले सभी निर्बल आय वर्ग के ही हों। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की दलाली में संलिप्त पाया गया और पर्याप्त साक्ष्य मिले तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे।