फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: पसीने से तरबतर श्रद्धालुओं में आराध्य के दर्शन की आस

विज्ञापन
विज्ञापन
वृंदावन। अधिक मास के साथ शनिवार होने के कारण जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर प्रांगण दर्शनार्थियों से खचाखच भर गया। रास्तों पर भक्तों की भीड़ लगी रही। भीषण गर्मी में भीड़ के बीच श्रद्धालु पसीनों से तरबतर हो आराध्य के दर्शन की लालसा में आगे बढ़ते जा रहे थे। बच्चों और महिलाओं को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन

नगर की पंचकोसी परिक्रमा मार्ग में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। विद्यापीठ चौराहा से लेकर बांकेबिहारी मंदिर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रहीं। दाऊजी तिराहा से मंदिर के द्वार तक दर्शनार्थी कतार में घंटों मंदिर पहुंचने का इंतजार करते नजर आए। भीड़ को नियंत्रित करने में जगह-जगह लगे पुलिसकर्मियों का पसीना छूट गया। मंदिर की संकरी गलियों में श्रद्धालु राधे-राधे बोलते हुए हाथ में प्रसाद लिए मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। भीड़ के दबाव के बीच श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के दर्शन किए। मंदिर के अंदर तैनात निजी गार्ड श्रद्धालुओं को दर्शन करते ही निकास द्वार की ओर बढ़ा रहे थे। धक्का-मुक्की के बीच श्रद्धालुओं को बमुश्किल दर्शन हो सके। यही हाल शाम के समय बांकेबिहारी के मंदिर के पट खुलने के बाद देखा गया।


लोग बोले, ठोस इंतजाम करें कमेटी

-श्रीबांकेबिहारी हाई पावर्ड प्रबंध कमेटी मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनी है लेकिन यह श्रद्धालुओं की परेशानी का सबब बन गई है। भीड़ प्रबंधन नहीं संभाल पाने के कारण श्रद्धालुओं की मौत हो रही हैं। कमेटी को तिरुपति बालाजी की तरह दर्शन व्यवस्था करनी चाहिए। -जगदीश शर्मा गुरुजी
विज्ञापन


- श्रीबांकेबिहारी उच्चाधिकार प्रबंध समिति के गठन से लोगों को उम्मीद जगी कि मंदिर की व्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन अव्यवस्था जस की तस बनी है। भीड़ प्रबंधन न हो पाने के कारण श्रद्धालुओं की मौत हो रही हैं। भीड़ और अव्यवस्था के कारण श्रद्धालु मुसीबत से जूझ रहे हैं। नरेंद्र शर्मा, पोशाक कारोबारी

-श्रीबांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं का सुगम दर्शन हो इसके लिए कमेटी की संरचना और कार्यप्रणाली में व्यापक परिवर्तन और सुधार की आवश्यकता है। क्योंकि लंबे समय से व्यवस्था में किसी तरह का सुधार नहीं हो सका। इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। -राकेश अग्रवाल, व्यापारी

- मंदिर प्रबंधन को सबसे पहले देश के अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों की व्यवस्था पर अध्ययन कर श्रद्धालुओं को सहज और सुरक्षित दर्शनों की व्यवस्था करनी चाहिए। मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा की अनदेखी कर मंदिर से होने वाली आमदनी पर अधिक ध्यान दे रहा है। - पवन गौड़, पुरोहित
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें