बर्खास्त सिपाही की हत्या साधु ने ही की थी। दरअसल बर्खास्त सिपाही नहीं चाहता था कि उसके परिवार वाले गोधूलिपुरम स्थित श्री मोहन सन्यास आश्रम में आएं। लेकिन साधु अक्सर उन्हें बुला लिया करता था। इसे लेकर पहले भी प्रभास गौतम का आश्रम के साधु से विवाद हुआ था। बर्खास्त सिपाही की हत्या भी इसी विवाद में की गई है।
आश्रम में रहने वाले और बर्खास्त सिपाही की हत्या के चश्मदीद पीयूष ने पुलिस को जो जानकारी दी है उससे पूरी वारदात का खुलासा हो गया है। कोतवाली प्रभारी उदयवीर सिंह नेे बताया कि मृतक प्रभास के परिवार का आश्रम में आना-जाना था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बर्खास्त सिपाही ने परिवार को रोकना शुरू कर दिया था। लेकिन मोहन सन्यास आश्रम के साधु राजेंद्रानंदपुरी परिवार वालों को बुला ही लेते थे।
इसे लेकर बर्खास्त सिपाही से विवाद रहने लगा। उस दिन भी दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ। इस पर साधु राजेंद्रानंदपुरी ने लोहे की छड़ उठाई और प्रभास गौतम के सिर में दे मारी। जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद साधु भी फांसी के फंदे पर झूल गया।
पुलिस को पीयूष ने बताया कि उसे डर था कि कहीं साधु उसे भी न मार दे लिहाजा वह भाग गया था। पुलिस ने बयान दर्ज करने के बाद पीयूष को उसके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया है।