कोसीकलां में जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान कुछ लोगों के चेहरे और कपड़ों पर लगे झंडे के स्टीकर को लेकर नगर में चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने स्टीकर को पाकिस्तान के झंडे से मिलता-जुलता बताया, जबकि मुस्लिम समाज के लोगों ने इसे धार्मिक आयोजन में इस्तेमाल होने वाले इस्लामिक झंडे का प्रतीक बताया।
पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की यौमे विलादत (जन्मदिन) के अवसर पर मुस्लिम समाज की ओर से नगर में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक झंडे और अन्य प्रतीकों के साथ शामिल हुए। इसी दौरान कुछ युवाओं और लोगों द्वारा चेहरे तथा जेब पर लगाए गए झंडे के स्टीकर को लेकर नगर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
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जुलूस में शामिल कुछ लोगों के चेहरे और कपड़ों पर लगाए गए स्टीकर दूर से दिखाई दे रहे थे। इन स्टीकरों को लेकर कुछ लोगों ने इसे पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज से मिलता-जुलता बताते हुए सवाल उठाए। वहीं मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों का कहना था कि स्टीकर धार्मिक आयोजन में इस्तेमाल किए जाने वाले इस्लामिक झंडे का प्रतीक है। स्टीकर के रंग, आकार और उस पर बने प्रतीक को लेकर जुलूस के दौरान भी लोगों के बीच चर्चा होती रही।
कुछ लोगों ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले झंडों और प्रतीकों की स्पष्ट पहचान होना जरूरी है, ताकि किसी तरह का भ्रम या गलतफहमी पैदा न हो।
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प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि जुलूस में चल रहे लोग इस्लामिक झंडा लगाकर चल रहे थे। उन्होने बताया कि जूलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अफवाहों को पर ध्यान न दें, जिससे भाईचारे की भावना कायम रहे। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद रावत ने बताया कि मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर कार्रवाई होगी।