यमुना की धारा के बीच व्यास गद्दी से द्वारकेश लाल महाराज श्रीमद्भागवत का श्रवण करा रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने दशम स्कंध का उल्लेख किया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी वेणु से ब्रज की गोपिकाओं को आकर्षित किया।
यमुना का यशगान करते हुए बताया कि यमुना के बगैर रास में प्रवेश नहीं हो सकता इसलिए गोपियो को कात्यानी (यमुना पूजन) व्रत करने से ही भगवान की प्राप्ति होती है। इसलिए पुष्टिमार्गीय हमेशा ही मुकुट कचरी धारण करके रहती है।
वृंदावन में शरद पूर्णिमा पर हर गोपी के साथ में भगवान श्रीकृष्ण ने महारास लीला की। उन्होंने बताया कि यमुना तट पर रहने से और यमुना पान करने वाले को यम भी छू नहीं सकता है। इस अवसर पर कार्ष्णि गुरु शरणानंद भी पहुंचे। कथा में बालकृष्ण परशुराम, गोपालकृष्ण, बालमुकुंद, मनोज भाई , शैल, पुनीत चतुर्वेदी आदि थे।