कुचावटी से चली राधारानी ब्रजयात्रा श्रीजी शर्मा के ओजस्वी वक्तव्य के साथ नृत्य, गान और बाबा नृसिंघदास की वंशी की मधुर धुन में मगन हो दुदावली होते हुए टांकोली पहुंची। डीग को लठावन भी कहते हैं।
डीग पहुंचने पर ब्रज यात्रियों का स्वागत हुआ। यहां ऐतिहासिक जल महल को देख यात्री मंत्रमुग्ध हो गए।
40 दिवसीय ब्रजयात्रा में एक पारिवारिक सुख की अनुभूति होती है तो तदानुकूल वातावरण भी दृष्टिगोचर होता है। सभी की परिचर्या बड़े ही भाव से की जाती है।
संत रमेश बाबा के दिव्य सत्संग में ब्रज के संरक्षण और संवर्धन की बात कही जाती है। बाबा ने यमुना महारानी के लिए हर कुर्बानी को तत्पर रहने का आह्वान किया। डा. रामजीलाल शास्त्री, राधाकांत शास्त्री आदि ने भी यमुना के मुक्तिकरण में सभी के सहयोग की अपेक्षा की।