अप्सरा टाकीज के सामने सड़क किनारे एक ढकेल पर चाय बेचने वाले रमेश की शख्सियत साधारण ही लगती है। अंतापाडा निवासी रमेश सुबह यहां आकर चाय की ठेल लगाते हैं और रात में घर चले जाते हैं। लेकिन वर्ष के दो पखवाड़े उनकी एक विशिष्ट पहचान होती है।
तिरंगा पुरुष की। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर वह अपनी पूंजी में से एक रकम निकालते हैं और छोटे-छोटे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा खरीदते हैं। इनको पखवाड़े भर आम और खास को वितरित करते हैं। वह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक को भी डाक से राष्ट्रीय ध्वज भेजते हैं।
रमेश बमुश्किल 150-200 रुपये हर रोज कमाते हैं। परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। चाहे कुछ हो जाए 26 जनवरी और 15 अगस्त के कुछ पहले से तिरंगा वितरित करने का उनका कार्यक्रम नहीं टलता। इस बार उनकी पत्नी किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। विगत दिनों उनको दिल्ली में स्थित हास्पिटल में भर्ती कराया गया।
रमेश उनकी तीमारदारी में थे। लेकिन उन्होंने वहां भी समय निकाला और 600 रुपये के छोटे-छोटे राष्ट्रीय ध्वज खरीदकर लोगों को वितरित किए। उनके सीने पर लगाए। उन्होेंने बताया कि 26 जनवरी को उन्होंने तत्कालीन डीएम राजेश कुमार के कोट की जेब पर भी तिरंगा लगाया था। रमेश वर्ष 2006 से राष्ट्र दिवसों पर तिरंगा वितरित कर रहे हैं। एकाएक ही ये विचार आया। शुरुआत की तो जुनून बन गया।