ठाकुर बांकेबिहारी वर्ष में एक ही दिन शरद पूर्णिमा पर महारास की मुद्रा में वंशी धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं। पिछले वर्ष लगभग ढाई लाख श्रद्धालु दर्शन करने आए थे, इस बार यह संख्या बढ़कर तीन लाख हो सकती है।
शरद पूर्णिमा पर 25 अक्तूबर को ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महारास की मुद्रा में भक्तों को दर्शन देंगे। इस वर्ष इन विशेष दर्शनों के लिए करीब तीन लाख श्रद्धालुओं के वृंदावन आने का अनुमान है। ठाकुरजी को इस अवसर पर मोर-मुकुट, मुरली और सोलह शृंगार धारण कराए जाएंगे।
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यह वर्ष में एक बार होने वाला विशेष अवसर है जब ठाकुरजी चांदी के सिंहासन पर सफेद जड़ाऊ पोशाक और स्वर्ण-रजत आभूषणों में सजेंगे। आसमान से चंद्रमा की धवल चांदनी उनके ऊपर पड़ेगी, जिससे दर्शन और भी अलौकिक लगेंगे। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात वंशीवट पर गोपियों संग महारास किया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि ठाकुरजी को चंद्रमा की रोशनी में विराजमान कराया जाता है। उन्हें विशेष खीर और चंद्रकला का भोग लगाया जाता है।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में हर उत्सव वर्ष में एक ही दिन मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ठाकुर बांकेबिहारी वर्ष में एक ही दिन शरद पूर्णिमा पर महारास की मुद्रा में वंशी धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं। पिछले वर्ष लगभग ढाई लाख श्रद्धालु दर्शन करने आए थे, इस बार यह संख्या बढ़कर तीन लाख हो सकती है।
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अन्य मंदिरों में भी विशेष दर्शन
शरद पूर्णिमा पर वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष दर्शन होंगे। इनमें ठाकुर राधा सनेह बिहारी मंदिर, राधा दामोदर मंदिर और राधारमण मंदिर शामिल हैं। राधाश्याम सुंदर मंदिर, गोविंद देव मंदिर, गोपीनाथ मंदिर और मदन मोहन मंदिर में भी ठाकुरजी श्वेत पोशाक धारण कर दर्शन देंगे। इन सभी मंदिरों में ठाकुरजी चंद्रमा की रोशनी में भक्तों को दर्शन देंगे।
यातायात व्यवस्था और प्रतिबंध
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए 25 अक्तूबर को वृंदावन में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए जगह-जगह बेरीकेड लगाए जाएंगे। मंदिर जाने और आने की व्यवस्था भी एकल रहेगी। पुलिस उपाधीक्षक वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि त्योहार के लिए यातायात प्लान पर कार्य किया जा रहा है।