उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सांपों ने मानसून में खूनी खेल खेला। सांपों के डसने से दो महीने में पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं 40 लोगों को किसी तरह बचा लिया गया।
बरसात के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले दो माह में जिले में करीब 45 लोगों को सांप के डसने के मामले सामने आए हैं। इनमें पांच की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में सर्पदंश के शिकार लोगों को चिकित्सकों ने जरूरत के अनुसार एंटी स्नेक डोज दी।
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बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जुलाई और अगस्त माह में अब तक करीब 45 लोग सर्पदंश के बाद उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। इनमें से 40 मरीजों को उपचार देकर बचा लिया गया । जिला अस्पताल में इनका उपचार किया गया।
बारिश का पानी सांपों के बिलों में भर जाने से वे बाहर निकलकर खेतों, झाड़ियों, कच्चे मकानों व कबाड़ में छिप जाते हैं। जिला अस्पताल में दो माह में पहुंचे लोगों को चिकित्सकों द्वारा एंटी स्नेक वेनम की डोज दी गई। सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि जहरीले सांप के काटने के बाद मरीज को झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
इनकी हुई मौत
हाईवे स्थित मासूम नगर निवासी 13 वर्षीय किशोर तेलिस, छाता निवासी नौ वर्षीय अभय, राया के नगला सहसू निवासी 75 वर्षीय प्रेमवती, सुरीर क्षेत्र के मुइद्दीनपुर गांव निवासी 52 वर्षीय किसान नेम सिंह तथा सुरीर क्षेत्र के नगला जगरूपा निवासी दिव्यांग नंदकिशोर की सर्पदंश से मौत हो चुकी है।
यह सावधानी बरतें
सांप के काटने पर घबराने के बजाय मरीज को शांत रखें और काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं। मरीज को जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाएं। घाव को काटना, चूसना या उस पर कोई घरेलू पदार्थ लगाना नुकसानदायक हो सकता है। सांप को पकड़ने या मारने में भी समय बर्बाद न करें। रात के समय बाहर निकलते समय टॉर्च का प्रयोग करें। जूते पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांच लें। घर के आसपास झाड़ियों व कचरे को जमा न होने दें।