आस्ट्रेलिया के संग्रहालय से दिल्ली के नेशनल म्यूजियम आ रही दो हजार साल पुरानी कुषाणकालीन आसीन बुद्ध की मूर्ति तस्करी के माध्यम से देश के बाहर गई थी।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि इंटेलीजेंस एजेंसियों की कार्रवाई में दिल्ली में नामी मूर्ति तस्कर हाथ लगा था। जब उससे कड़ाई के साथ पूछताछ की गई तो उसने बताया कि माफियाओं ने कुषाणकाल की आसीन अभय मुद्रा में बुद्ध की मूर्ति विदेशियों को बेची थी। इसी इनपुट के आधार पर भारत सरकार ने पहल की।
इधर, ऑस्ट्रेलिया के शहर कैंड्रा स्थित नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया के प्रशासन ने भी इस मूर्ति के वहां पहुंचने के दस्तावेजों को खंगाला। ये दस्तावेज भी फर्जी पाए गए। तब जाकर इस दुर्लभ मूर्ति के भारत आने का रास्ता साफ हुआ।
एंटिबिटी एंड ट्रेजर एक्ट के तहत हो रही वापसी
उपअधीक्षण पुरातत्व डा. विनय गुप्ता ने बताया कि एंटिबिटी एंड ट्रेजर एक्ट 1976 में लागू हुआ था। इसके तहत किसी भी देश की 100 साल से अधिक पुरानी वस्तु यदि किसी देश में है और उसके वहां पहुंचने की प्रक्रिया नियमों के तहत नहीं है, तो फिर उस देश को वो वस्तु लौटानी होती है। इसी एक्ट के तहत बुद्ध की ये दुर्लभ मूर्ति भारत वापस आ रही है। जिसे दिल्ली के संग्रहालय में रखा जाएगा।