छाता शुगर मिल पर धरने में गीतों की गूंज और नृत्य के जाती महिलाएं।
छाता। बंद पड़ी छाता शुगर मिल को चालू कराने की मांग को लेकर भूतपूर्व सैनिक परिषद के बैनर तले चल रहा धरना प्रदर्शन बुधवार को 21वें दिन में प्रवेश कर गया। सुबह से ही धरना स्थल पर किसानों और ग्रामीणों का जुटना शुरू हो गया। धरने में दिन-प्रतिदिन महिला-पुरुषों की भीड़ बढ़ रही है। इधर, महिलाओं ने गीत, संगीत व नृत्य के माध्यम से आवाज बुलंद की। कहा, यह चूल्हों के भविष्य की लड़ाई है।
कर्मयोगी सूबेदार ललित कुमार ने कहा कि लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिल क्षेत्र के विकास और किसानों की आजीविका का मुख्य केंद्र रही है, जिसे हर हाल में शुरू कराया जाना चाहिए। जब तक लखनऊ का प्रशासन इस मांग पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। आसपास के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाते और झूमते-नाचते हुए सीधे छाता शुगर मिल धरना स्थल पर पहुंचीं।
महिलाओं के इस अनूठे और जोश से भरे अंदाज ने चल रहे आंदोलन में नई ऊर्जा दी है। लोकगीतों के माध्यम से अपनी पीड़ा और मिल चालू कराने की जिद्द को बतातीं महिलाओं का कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ किसानों के अस्तित्व की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के परिवारों और उनके चूल्हों के भविष्य की है। इस दौरान जबर सिंह प्रधान, अमर सिंह, दिगंबर चौधरी, ओमप्रकाश प्रधान, किशन सिंह आर्य, महिपाल सिंह आर्य, मुरारी जादौन, संतोष कुमार, सूबेदार अतर सिंह और बीरी सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण व किसान मौजूद रहे।