भागवत कथा कहते अनिरुद्धाचार्य महाराज
नौहझील। श्रीझाड़ी हनुमानजी मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा प्रवक्ता अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अमृतमय वाणी से पंडाल में उपस्थित भक्तों की आंखों को नम कर दिया। उन्होंने भक्त और भगवान के मिलन की अद्भुत चर्चा सुनाई।
बुधवार को कथा में अनिरुद्धाचार्य ने बहन-बेटियों को उनके उत्तम भविष्य के लिए समझाया। बताया कि किसी के झूठे प्रेम में पड़कर अपना चरित्र और जीवन बर्बाद करने से पहले उन माता-पिता की इज्जत और भरोसे के बारे में सोचना जो वह आप पर करते हैं। कभी किसी के झांसे में आकर अपना चरित्र खराब मत करना। अपने भारत की नारियां चरित्र के लिए जानी जाती हैं, मरना मंजूर था परंतु क्या मजाल जो कोई पर पुरुष हाथ भी लगाए। कहा कि सच्चा मित्र वही है जो मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए मदद कर दे। आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता, जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है।
सुदामा प्रसंग सुन भक्तों की आंखों में आंसू आ गए। राजा परीक्षित के मोक्ष गमन के बारे चर्चा करते हुए बताया कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण विश्वास के साथ कथा श्रवण करे तो वह भी मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। भजन गायन के दौरान विदाई गीत सुनकर श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू बह गए। व्यास पूजन जगद्गुरु नाभा द्वाराचार्य सुतीक्षण दास महाराज, महंत रामरतन दास महाराज, विधायक राजेश चौधरी, ब्लॉक प्रमुख सुमन चौधरी ने आरती उतार कर किया। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अनिरुद्धाचार्य का स्वागत किया। दिल्ली के पूर्व मेयर आदेश गुप्ता, मुकेश वार्ष्णेय, प्रधान प्रशांत गुप्ता, मनीष जिंदल, उमाकांत शर्मा, संजय, नीरज, सुरेन्द्र, ज्ञानेंद्र ठाकुर, बिन्ना बघेल आदि मौजूद रहे।