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श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह मामला:  जिला जज ने रंजना अग्निहोत्री के वाद में निर्णय रखा सुरक्षित, 19 मई को सुनाया जाएगा फैसला

Thu, 05 May 2022 08:48 PM IST
सुशील कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा 

सार

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा एक वाद अदालत में पेश किया गया था। जिसमें उन्होंने वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को श्री कृष्ण विराजमान की संपत्ति माना है और उन्होंने अदालत से कहा है कि यह संपत्ति श्रीकृष्ण विराजमान को सौंपी जानी चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दावा करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के वाद में जिला जज की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। जिला जज 19 मई को फैसला सुनाएंगे।

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जानकारी रहे कि सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता  द्वारा जिला जज की अदालत से वाद को  दर्ज करने की प्रार्थना की है। यहां पर रिवीजन में सुनवाई चल रही है। निचली अदालत ने केस को सुनवाई योग्य नहीं माना था। गुरुवार को जिला जज राजीव भारती की अदालत में दोनों पक्षों ने बहस की। बहस सुनने के बाद जिला जज ने निर्णय को रिजर्व कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा एक वाद अदालत में पेश किया गया था। जिसमें उन्होंने वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को श्री कृष्ण विराजमान की संपत्ति माना है और उन्होंने अदालत से कहा है कि यह संपत्ति श्रीकृष्ण विराजमान को सौंपी जानी चाहिए। वह खुद श्रीकृष्ण विराजमान की भक्त बन कर सामने आई हैं। अदालत में सबसे पहले इस संबंध में
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वाद पेश करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता द्वारा पूर्व में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट तथा शाही ईदगाह मस्जिद से संबंधित पदाधिकारियों के बीच में समझौते को गलत बताया। 

गुरुवार को वादी की ओर से अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन तथा अन्य द्वारा जिला जज की अदालत में बहस की गई। शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भी अदालत में अपना पक्ष रखा। दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद जिला जज राजीव भारती ने निर्णय को रिजर्व करते हुए निर्णय के लिए 19 मई तय की है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि अदालत में हमने अपना पक्ष रखा है।

अदालत इस संबंध में 19 मई को निर्णय देगी। वहीं एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि अदालत में उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता द्वारा पेश किया गया वाद सुनवाई योग्य नहीं है। 

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