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Mathura News: श्रीबांके बिहारी बिल्ड होम को लौटाने होंगे 11.80 लाख रुपये

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मथुरा। वृंदावन की एक आवासीय योजना में दो एलआईजी मकानों की बुकिंग कराने वाले खरीदारों को बिल्डर द्वारा उनकी जानकारी के बिना एक एमआईजी मकान में समायोजित कर दिया गया। कई वर्षों तक धनवापसी और स्पष्टीकरण न मिलने पर दोनों खरीदारों ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। आयोग ने श्री बांके बिहारी बिल्ड होम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक को 11.15 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने तथा 65 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। कुल देय राशि लगभग 11.80 लाख रुपये बनती है।
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किशोरी कुंज कॉलोनी निवासी कपिल कुमार अग्रवाल और गली ठठेरान, कच्ची सड़क निवासी दीपक वर्मा ने छह जनवरी 2014 को वृंदावन स्थित श्री कृष्णावास आवासीय योजना में 50-50 हजार रुपये जमा कर दो एलआईजी मकान बुक कराए थे। प्रारंभिक बुकिंग राशि 14.70 लाख रुपये निर्धारित की गई थी और 10 हजार रुपये मासिक किस्त तय हुई थी। दोनों ने अक्तूबर 2021 तक विभिन्न किस्तों के माध्यम से कुल 7.60 लाख रुपये जमा किए।
वाद के अनुसार बिल्डर ने बिना पूर्व सूचना और बिना सहमति के दोनों एलआईजी मकानों के स्थान पर एक एमआईजी मकान आवंटित कर दिया। जानकारी होने पर दोनों ने किस्तों का भुगतान रोक दिया और नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण तथा धनवापसी की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
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मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल की पीठ ने की। आयोग ने माना कि बिल्डर ने उपभोक्ताओं को निर्धारित सेवा उपलब्ध नहीं कराई और यह सेवा में स्पष्ट कमी का मामला है। आयोग ने बिल्डर को 11.15 लाख रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने तथा 65 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही निर्देश दिया गया कि आदेश की तिथि से 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं होने पर राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
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