श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन जन्मस्थान पर श्रीविग्रह की छटा अनूठी होगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस बार भगवान श्रीराधाकृष्ण चंद्रकी पोषाक धारण करेंगे।
चंद्रमा, फूलपत्ती, पुष्पाकृति, शंखाकृति और मयूराकृति मुख रूप से ठाकुरजी की पोषाक पर रेशम, रत्न और जरी से उकेरी जाएंगी। प्रिया-प्रियतम के निज गर्भगृह की सज्जा भी अनूठी और निराली होगी, जहां लाल पुष्प से ठाकुरजी की पिछवाई तैयार की जाएगी।
भगवान श्रीतिरुपति बालाजी के श्रीविग्रह के बगल और पृष्ठभाग में उत्कीर्ण स्तंभ और सिंहाकृति का प्रतिरूप भागवत भवन में स्थित श्रीविग्रह के समीप स्थापित किया जाएगा।
बिल्कुल सजीव दिखने वाले घंटे वास्तव में वजन में अत्यंत हल्की सामग्री से तैयार किए जा रहे हैं। घंटे और घंटियों की नक्काशी इतनी सुंदर और सजीव है कि इसको देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि सिद्धहस्त कारीगर की कला का यह चमत्कार है। पुष्प और घंटियों के दिव्य तालमेल से बनाया जा रहा यह बंगला निश्चित रूप से श्रद्धालुओं की भावनाओं को पुष्ट करेगा।
भागवत भवन की सुंदर चित्रकारी और नक्काशी भी बंगले के मध्य दृष्टव्य हो ऐसा प्रयास है। विदेशी तकनीक और ब्रज की कला का एक अनूठा और अभिनव प्रयोग यह बंगला संभवत: ब्रज में श्रद्धालुओं को पहली वार देखने को मिलेगा।