यमुना मुक्ति का संकल्प और राधे नाम संकीर्तन के साथ श्रीराधारानी ब्रज यात्रा रविवार को भोर में ही सेही की ओर चल पड़ी। नंदघाट, बत्सवन होती हुई कान्हा के भक्त आगे बढ़ रहे थे। मान मंदिर की बालाएं हर किसी का मन मोह रही थीं। संत रमेश बाबा ने भक्तों से यमुना मुक्ति के लिए संघर्षरत रहने की बात कही।
भागवताचार्य रामजीलाल शास्त्री ने नंदघाट, बछवन के बारे में विस्तार से बताया। यात्रा में साथ चल रहे मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने पड़ाव स्थल पर अपने संबोधन में कहा कि ब्रज संस्कृति लुप्त होने के कगार पर है। अगर समय रहते नहीं चेते जो काफी पछताना पडे़गा।
भागवताचार्य श्रीजी शर्मा ने पौराणिक स्थलों के बारे में बताया। नृत्य के माध्यम से सभी को मोह लिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माजी को श्रीकृष्ण के सखाओं द्वारा अच्छे बेर खाने से मोह हो गया था। उन्होंने उनके सखाओं का वरण कर लिया लेकिन इसके बाद भी ब्रज में सखा वैसी ही लीला करते देखे तो ब्रह्माजी ने श्रीकृष्ण से माफी मांगी। इसके बाद संपूर्ण ब्रज परिक्रमा करने पर उनके पाप का शमन हुआ।
यात्रा में आज
सोमवार को श्रीराधारानी ब्रजयात्रा वंशीवट होते हुए भांडीरवन में पड़ाव करेगी।