हर घड़ी मन में बसने वाले कन्हैया के गांव में पहुंचकर ब्रजयात्री आनंदित थे। मन कान्हा में रम गया और भक्ति अपने परवान पर थी। कुछ पल को लगा कि जिसके स्मरण में तीनों लोकों सुख है, क्याें न उनके गांव में ही बसा जाए। लेकिन, आगे बढ़ने का नाम ही यात्रा है, यह मानकर श्रीराधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा के पदयात्री नंदगांव से चल पड़े और नंदलाला से अगले बरस फिर आने की बात कही।
मानमंदिर सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्रीराधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा ने शनिवार को सुबह ही अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान कर दिया। ब्रजयात्रियों ने अगले वर्ष दोबारा आने की प्रार्थना कर नंदीश्वर पर्वत को नमन किया और विदा ली। ब्रजयात्रा आसेश्वर, जाब, किशोरीवट, राधाकांत मंदिर, कोकिलावन होते हुए पांडव गंगा की ओर बढ़ चली थी।
इस दौरान 12 किमी की दूरी तय कर यात्री पड़ाव स्थल पर पहुंचे। जाब में पहुंचने पर धनीराम शर्मा, गोविंद सिंह, सुरेश उपमन्यु सहित दर्जनों ग्रामीणों ने स्वागत किया। ब्रजयात्रियों ने किशोरीवट और हुरंगा स्थल के दर्शन किए। सुबह 10:30 बजे ब्रजयात्रा पांडव गंगा पड़ाव पर पहुंच गई थी।
मान्यता है कि वनवास काल में ब्रज भी पांडवों का निवास रहा था। पांडवों ने जहां-जहां भ्रमण किया, उनमें से पांडव गंगा भी एक दिव्य स्थल है। सघन वृक्षों से आच्छादित इस स्थल का वर्षों पूर्व मानबिहारी लाल ने जीर्णोद्धार कराया गया था।
कंस ने की गो सेवा
कृष्णकाल में राक्षसों के असफल होने पर कंस स्वयं श्रीकृष्ण को मारने आया था। जाब के हुरंगा स्थल के समीप बने किशोरी कुंड पर वह आया तो राधारानी के तेज को सहन नहीं कर सका और सरोवर में कूद गया। सरोवर से जब निकला तो वह स्त्री रूप में हो गया। इस दौरान ललिता सखी ने कंस से छह माह तक गो सेवा कराई। अंत में क्षमा याचना के बाद वह अपने असली रूप में आ पाया।
ब्रजयात्रा में आज
बड़ी बठैन, छोटी बठैन, चरन पहाड़ी होते हुए यात्रा रासौली (रासवन) में विश्राम करेगी।
अफवाहों पर न दें ध्यान
श्रीराधारानी ब्रजयात्रा को लेकर भ्रामक दुष्प्रचार किया जा रहा है। मान मंदिर के सुनील सिंह ने बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा यात्रा को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। पवित्र ब्रजयात्रा शांति और सद्भाव से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही है।