ब्रजयात्रा का 23 वां दिन। तय दूरी करीब 250 किमी। उत्साह पहले दिन से कई गुना बढ़ा हुआ। कृष्ण की लीलाओं के पान की लालसा और लीलास्थलों के दर्शन कर पुण्य कमाने की कामना के साथ गोसंवर्धन और यमुनाजी को मुक्त कराने का संकल्प। संकीर्तन जैसे यात्रियों की थकान को दूर कर निरंतर ऊर्जा का संचार कर रहा है।
मान मंदिर बरसाना से प्रारंभ हुई ब्रजयात्रा 23वें दिन दाऊजी के लीलास्थल में राया के गांव हवेली से बहादुरपुर, कारब, गढ़ी रामप्रसाद, रमचेलिया होते हुए रविवार को नगला लोका पहुंची। कारब में प्रवेश के दौरान पहले से प्रतीक्षा में बैठे स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। चाय, दूध, खील बतासे और अन्य खाद्य सामग्री से यात्रियों को जलपान कराया। नगला लोका में भी ब्रजयात्रियों का अभूतपूर्व स्वागत किया गया। ब्रजवासियों का आतिथ्य देख ब्रजयात्री गदगद हो गए।
पड़ाव स्थल पर पहुंचे ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने कहा कि जिसकी भोग और ऐश्वर्य में आसक्ति है। उसका कृष्ण में मन नहीं लग सकता। काम से अग्नि पैदा होती है और अग्नि से संताप। संतोष से ही काम को नष्ट किया जा सकता है। काम भक्ति में बाधक होता है। ब्रजयात्रियों और ब्रजवासियों ने यमुना रक्षा का प्रण लिया। इस दौरान उन्होंने प्राणों की बाजी लगा कर भी यमुना मुक्त कराने का संकल्प लिया।
राष्ट्रीय संयोजक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि यमुना महारानी को लेकर ब्रजवासियों में अनोखा उत्साह और उमंग है। ब्रजवासी यमुना महारानी के लिए आर-पार की लड़ाई को तैयार है। भागवताचार्य श्रीजी शर्मा ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा को स्वयं आते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के एक हजार नाम हैं।
एक नाम जपने से ही जीवन स्वर्ग बन जाता है। हमें यमुना मुक्तिकरण अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर सुनील सिंह, डॉ. रामजीलाल, पंकज चौबे, देवेन्द्र पहलवान, नरसिंह दास महाराज आदि उपस्थित रहे। ब्रज यात्री रात में नगला लोका में विश्राम के बाद सोमवार को शेषाअवतार दाऊजी महाराज के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे।