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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर: शरद पूर्णिमा पर होंगे दिव्य चंद्रलोक और छप्पनभोग के दर्शन

Fri, 07 Oct 2022 06:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में शरद पूर्णिमा पर भक्त दिव्य चंद्रलोक और छप्पन भोग के दर्शन का आनंद ले सकेंगे। मंदिर में महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर मथुरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 श्रीकृष्ण-जन्मस्थान पर रविवार को शरद पूर्णिमा महोत्सव के दौरान चंद्रलोक और छप्पनभोग के दर्शन होंगे। गिरिराजजी का अभिषेक और खीर प्रसादी का वितरण किया जाएगा। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के तत्वावधान में श्रीकृष्ण सेवा मंडल द्वारा महोत्सव का शुभारंभ प्रात: 9:00 बजे श्रीगिरिराज जी के पंचगव्य अभिषेक से होगा। सायं 4:00 बजे से श्रीकेशवदेव मंदिर को भव्य चंद्रलोक का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। भगवान केशवदेव महाराज के श्रीविग्रह के दिव्य चंद्रलोक में भक्तों को दर्शन होंगे। सायं 5:00 बजे से गोचरण लीला के मध्य श्री गिरिराजजी को छप्पनभोग अर्पित होंगे। शाम 7:00 बजे से 9:00 बजे तक भजन गायक राहुलदास बिहारी द्वारा भजन गायन होगा, जिसके बाद खीर का वितरण किया जायेगा। 11:30 बजे तक दिव्य महारास का मंचन होगा। रात्रि 11:30 बजे श्रीगिरिराज जी की शयनआरती होगी। आयोजन के लिए श्रद्धालुओं का जन्मस्थान में प्रवेश रात 11:30 बजे तक होगा।

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खीर का वितरण

श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा संचालित आयुर्वेद चिकित्सालय प्रांगण में आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा श्वास (दमा) के रोगियों को 09 अक्तूबर की मध्यरात्रि में खीर के साथ श्वास की दवा का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।

धन पाने के लिए उपाय

रात के समय मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें गुलाब के फू लों की माला, सफेद मिठाई और सुगंध अर्पित करें। साथ ही ‘ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद - प्रसीद महालक्ष्मये नम:’ मंत्र का जाप करें। मां लक्ष्मी जीवन की तमाम समस्याओं का समाधान करती हैं। बस सच्चे मन से बात पहुंचानी होती है।

चंद्रमा होता है पृथ्वी के निकट

ज्योतिषाचार्य पंडित अजय तैलंग का कहना है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इस दिन वह अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है जिससे उसकी किरणें अमृत की वर्षा करती हैं। इस बार शरद पूर्णिमा 9 अक्तूबर को सुबह 03 बजकर 41 मिनट से शुरू होगी जो अगले दिन सुबह 02 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर सवार होकर धरती पर भ्रमण कर भक्तों की समस्याओं को दूर करती हैं। मान्यता है इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है। मान्यता है चंद्रमा की किरणों में रखी खीर का सेवन करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
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