जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज ने शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर स्वर्ण रजत निर्मित सिंहासन पर विराजमान होकर मोर, मुकुट, कटि, कांछनी और वंशी धारण की। अपने आराध्य के दर्शन पाकर भक्त निहाल हुए। ठाकुरजी की एक झलक पाने को श्रद्धालु लालायित दिखे।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर बांकेबिहारी मंदिर को सफेद गुब्बारों से सजाया गया। पर्दे और विद्युत झालर भी सफेद। पूरा प्रांगण सफेद दिख रहा था। सुबह बांकेबिहारी के भक्तों को एक घंटे अधिक दर्शन का लाभ मिला और पट शाम के तय समय से आधे घंटे पूर्व पांच बजे ही भक्तों के लिए खोल दिए गए।
राजभोग आरती 12 बजे के स्थान पर 12:55 बजे और शयन भोग आरती रात 9:30 बजे के स्थान पर 10:25 बजे हुई। मंदिर सेवायत राघु गोस्वामी, विंदू गोस्वामी, लोकेश बिहारी गोस्वामी और छब्बू गोस्वामी ने भक्तों को प्रसाद दिया।
सनेहबिहारी मंदिर में भी शनिवार को शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। ठाकुर राधा सनेह महाराज ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर को रंग बिरंगे फूलों से सजाया गया। दक्षिण शैली के रंगनाथ मंदिर में भी शरद महोत्सव मनाया गया। इससे पूर्व नगर में सुबह से ही श्रद्धालुओं ने यमुना स्नान किया और अपने कार्तिक नियम सेवा का शुभारंभ किया। नगर की परिक्रमा देने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
खीर और चंद्रकला का भोग लगाया
शरद पूर्णिमा पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को खीर, चंद्रकला और दूधभात का भोग लगाया गया। सायंकालीन बेला में मंदिर के सेवायतों ने सबसे पहले ठाकुरजी का दूधभात के साथ ही चंद्रकला और मेवा मिश्रित खीर का भोग लगाया।