जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेनर्म) में स्वीकृत 60 करोड़ का सीवर प्रोजेक्ट फंस गया है। 66 किलोमीटर सीवर बिछाने के बाद भी जल निगम इसे पालिका के सपुर्द करने की स्थिति में नहीं है। डेढ़ साल से यह कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। अफसरों का कहना है कि इसे पूर्ण करने के लिए एक बार फिर शासन से धनराशि की मांग की गई है।
मनमोहन सिंह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जेनर्म के तहत बिछाई गई सीवर लाइन अब तक शहर के लिए उपयोगी साबित नहीं हो सकी है। इस योजना के तहत शहर में 66 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जानी थी। इसके लिए 60 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बना था।
करीब पांच साल तक शहर भर में खोदाई के बाद सीवर लाइन बिछाई गई, लेकिन डेढ़ वर्ष से यह काम रुका हुआ है। होलीगेट के आसपास करीब 18 किलोमीटर की सीवर लाइन को पालिका उपयोग में ला रही है। बाकी क्षेत्र में बिछी सीवर लाइन को जल निगम अब तक पालिका को हस्तांतरित नहीं कर सका है। ऐसे में अब तक नई सीवर लाइन का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।
सीवर की गुणवत्ता पर उठे सवाल
जेनर्म में सीवर लाइन बिछाए जाने के दौरान इसकी गुणवत्ता पर लोगों ने सवाल उठाए थे। यहां तक कि पालिका के स्तर से की जा रही इसकी निगरानी में भी जल निगम की कार्यप्रणाली पर दाग लगा था, लेकिन फिर भी इसकी गुणवत्ता की जांच नहीं हो सकी।
सीवर का काम कर रही कार्यदायी संस्था जल निगम को अधूरे कार्य को पूर्ण करने के लिए कहा गया है, जिससे शहर में इसका उपयोग किया जा सके। इसके लिए अब आवश्यक धनराशि की मांग एक बार फिर जल निगम की ओर से शासन से की जा रही है।
- ब्रजेश कुमार, ईओ मथुरा नगर पालिका