जिले की राजस्व वसूली में सहयोग के लिए तनख्वाह पा रहे जिले के सीजनल सेवक अफसरों के घरों पर चाकरी कर रहे हैं। कोई किसी अफसर के घर रसोईया बना है तो कोई गाड़ी चला रहा है। जिले में यह स्थिति 1-2 सीजनल सेवकों की नहीं बल्कि करीब 40 सेवकों की है।
राज्य सरकार ने राजस्व वसूली के लिए सीजनल अमीन और उसके साथ एक सीजनल सेवक की तैनाती का प्रावधान किया है। जिले में भी इस व्यवस्था के तहत 40 अमीन और इसी संख्या में सीजनल सेवकों की तैनाती वर्तमान सीजन के लिए की गई है। लेकिन, सीजनल सेवक अमीनों को राजस्व वसूली में सहयोग देने के बजाए प्रशासनिक अफसरों के घरों पर चाकरी कर रहे हैं।
इसमें डीएम से लेकर सभी एडीएम और एसडीएम तक शामिल हैं। इन प्रशासनिक अफसरों के घरों पर करीब 40 सेवकों की तैनाती है। डीएम आवास पर चार सीजनल सेवक तैनात हैं तो सभी एडीएम के यहां 2-2 सेवक काम कर रहे हैं। सीजनल अमीनों का कार्य क्षेत्र एसडीएम के अधीन होने के कारण सीजनल सेवकों की तैनाती एसडीएम के घरों पर डीएम से कम नहीं है। तहसीलदार भी इस व्यवस्था से अलग नहीं हैं।
इस तैनाती में स्थायी अमीनों के 111 स्वीकृत पदों के सापेक्ष जिले में 90 स्थायी अमीन के साथ तैनात सेवकों की स्थिति भी यही है। इनकी तैनाती भले ही अमीन के साथ हो लेकिन काम साहब के घर पर ही हो रहा है। इसमें अनेक तो एसडीएम और तहसीलदारों की गाड़ियां भी चला रहे हैं।