मथुरा के छाता डाकघर में फर्जी टिकट के सहारे रजिस्ट्री और साधारण डाक भेजने का मामला प्रकाश में आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने छाता डाकघर के उप डाकपाल और क्लर्क को निलंबित कर दिया है। अब विभाग पूरे मामले की जांच करा रहा है।
डाकघर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 20 दिसंबर 2024 के आसपास छाता डाकघर से प्रतिदिन 1500 से अधिक डाक बुक होकर बाहर भेजी जा रहीं थीं। प्रतिदिन की सीमा से पार डाक भेजे जाने पर कुछ शक हुआ तो विभाग ने इसकी जांच कराई। जांच में पता चला कि डाक भेजने वाले लिफाफे पर पहले से डाक टिकट चिपका कर लाते थे। जिन्हें अलग-अलग पतों पर भेजा जाता था।
विभाग ने इसकी जांच की तो पता चला कि लिफाफे में 5-10 और 20 रुपये की लगी टिकट फर्जी हैं। प्रारंभिक जांच में यह सब देख छाता डाकघर के कर्मचारियों की मिलीभगत होने की जानकारी मिली। जिसके बाद प्रवर डाक अधीक्षक ने एक जनवरी को उप डाकपाल मदनलाल और क्लर्क मोहित को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच करने के लिए टीम गठित की है।
डाक टिकट चेक करने की नहीं व्यवस्था
विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि छाता डाकघर एक बड़े हॉल में संचालित हो रहा है। यहां पर डाक टिकट को पहचानने के लिए कोई मशीन नहीं है। ऐसे में फर्जी डाक टिकट चिपकाकर कब से डाक भेजी जा रही थी इसकी जानकारी मामले की जांच में पता चल सकेगी। कई अधिकारी तो इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
मथुरा के प्रवर डाक अधीक्षक विजेंद्र सिंह ने बताया कि छाता डाकघर में फर्जी डाक टिकट का मामला संज्ञान में आया है। मामले की प्रथम जांच में जानकारी सही होने पर उप डाकपाल और क्लर्क को निलंबित कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की टीम जांच कर रही है।