श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सोमवार को समापन हो गया। ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय समग्र चिंतन’ विषय पर आयोजित बैठक में वक्ताओं ने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को सभी के सामने रखा।
‘मनोहर लाल भैयाजी सभागार’ में मुख्य वक्ता भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन) शिवप्रकाश ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार एकात्मवाद का संदेश देते हैं। दीनदयाल उपाध्याय का मत था कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई और दवाई की आवश्यकताएं पूरी होनी चाहिए।
वह समाज को भूखमुक्त रखना चाहते थे। दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि खाने का अधिकार जन्म से प्राप्त होता है, केवल कमाने की पात्रता शिक्षा से आती है।
अर्थ की प्राप्ति के लिए उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोजगार की उपलब्धता की बात कही। उद्योगों को कृषि से संबद्ध करने का विचार रखा। काम की गारंटी और समान काम के लिए समान समान मजदूरी का विचार दीनदयाल उपाध्याय का ही है। अध्यक्षीय संबोधन में पूर्व कुलपति डॉ. गिरीशचन्द्र सक्सेना ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।
धन्यवाद ज्ञापन दीनदयाल स्मारक समिति के मंत्री डॉ. रोशनलाल ने दिया। संचालन डॉ. अजय शर्मा और डा. टीपी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। प्रो. चंद्रभान गुप्त, बांकेबिहारी माहेश्वरी, आर्किटेक्ट जगदीश प्रसाद अग्रवाल, पद्म सिंह, डॉ. राकेश चतुर्वेदी, डा. कमल कौशिक, डा. केके कनौडिया, डा. डीपी गोयल, तेजवीर सिंह, अशोक टैंटीवाल, रविकांत गर्ग, प्रणतपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।