उत्पादन क्षमता पर्याप्त होने के बावजूद समन्वय की कमी बिजली सप्लाई में बाधा बन रही है। तहसील स्तर पर 12 घंटे बिजली देना निर्धारित है लेकिन व्यवस्थाओं की कमी के चलते यह भी नहीं हो पा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की ओर से रविवार को स्थानीय होटल में आयोजित सेमिनार में यह बात कही गई। बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण को गलत बताया और निरंतर घाटे में जा रहे ऊर्जा निगमों के सुचारु संचालन और उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति देने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
सेमीनार के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल ने कहा कि अक्तूबर 2016 तक देहात में 16-18 घंटे, तहसील को 18-20, जिले को 22 और महानगर को 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य बड़ा लेकिन संभव है। शहरी क्षेत्र में हमें उत्पादन क्षमता में 60 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करनी है।
सामूहिक जिम्मेदारी से यह कार्य होगा। प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विभाग के अधिकारी शासन की नीतियों के अनुरूप कार्य करें।
राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के अध्यक्ष इंजीनियर आरके सिंह ने बताया कि प्रदेश में बिजली की मांग 12000 से 14000 मेगावाट के बीच है। आपूर्ति 11000 से 12000 मेगा वाट हो पा रही है। इसके पीछे सार्वजनिक क्षेत्र में नया बिजलीघर न स्थापित करना कारण बताया गया। निजी कंपनियों द्वारा अनुबंध के अनुरूप पावर हाउस न लगाने को मौजूदा ऊर्जा नीति की विफलता बताया। उन्होंने बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के साथ, लाइन लॉस में कमी और राजस्व वृद्धि किए जाने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा ने कहा कि सरकार के निर्णय के अनुरूप है अक्तूबर 2016 तक तहसील स्तर पर 16-18 घंटे, महानगरों में 22-24 घंटे बिजली देने के लिए उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण तीनों स्तरों पर काम शुरू हो गया है। निर्धारित समय सीमा के अंदर कार्य पूरा किया जाएगा। इसे पूरा करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।
उन्होंने तहसील स्तर पर 12 घंटे बिजली आपूर्ति न हो पाने को व्यवस्थाओं बताया और सुधार का आश्वासन दिया। आल इंडिया इंजीनियर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने रेवेन्यू और वितरण की व्यवस्था पर जोर देने को कहा। इस दौरान यूपी पावर ट्रांसमिशन के एमडी विशाल चौहान, ऊर्जा क्षेत्र के निदेशक सचिव राजीव सिंह, अनिल मित्तल, एमसी अग्रवाल, एमडी पश्चिमांचल विजय विश्वास पंत, एमडी दक्षिणांचल पीएन सिंह आदि उपस्थित थे। संचालन संघ के क्षेत्रीय सचिव बीपी सिंह ने किया।
विकास और कानून व्यवस्था बिजली पर निर्भर - प्रमुख सचिव
सेमिनार के बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अक्तूबर 2016 तक प्रदेश के 3.29 करोड़ घरों में बिजली पहुंचाने के सपने को साकार करने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। लगभग 5 हजार मेगावाट की परियोजनाएं प्रारंभ करने के लिए हम प्रयासरत हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में विकास और कानून की व्यवस्था बिजली पर निर्भर है। बिजली विभाग में रिक्त पदों पर भर्तियां 2019 तक पूरी करने का लक्ष्य है। बिजली चोरी रोकने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। फिलहाल प्रदेश में वितरण के लगभग 2800 विद्युत उपकेंद्र हैं। एक साल में 600 केंद्रों की बढ़ोत्तरी के साथ प्रत्येक गांव में 16-18 घंटे बिजली पहुंचाई जाएगी।