मथुरा। स्कूली वाहनों में नौनिहालों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आरटीओ के प्रवर्तन दलों की जांच में सामने आया है कि 70 बसें कबाड़ होने के बाद भी बच्चों को लाने-ले जाने में लगी हुई हैं, जबकि 178 वाहनों की फिटनेस खत्म हो चुकी है तो 181 के परमिट ही नहीं बने थे। इन्हें फिटनेस व परमिट के बाद ही सड़कों पर चलने दिया जाएगा।
परिवहन विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान में स्कूल बसों की दस्तावेजों की जांच, फिटनेस और सुरक्षा मानकों की बारीकी से पड़ताल की गई। जिन वाहनों के परमिट या फिटनेस प्रमाण पत्र समाप्त हैं, वे बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। जनपद में आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड के लगभग 108 निजी स्कूल हैं, जिनमें लगभग 1280 बसों को संचालित किया जा रहा है। इन स्कूलों में 70 बसें ऐसी पाई गईं जिनकी आयु पूरी हो चुकी हैं। यानी वह कबाड़ की श्रेणी में आ चुकी हैं मगर बच्चों को ढो रही हैं। विभाग ने ऐसी कई बसों को सीज किया तो कई का संचालन बंद करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्कूल संचालकों को चेतावनी दी है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर अपडेट कराएं, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी राजेश राजपूत ने बताया कि स्कूली बसों को जांच करने के लिए अभियान आगे भी लगातार चलाया जाएगा, ताकि स्कूली बच्चों की यात्रा सुरक्षित बनाई जा सके। अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को केवल मानक पूरा करने वाले वाहनों से ही स्कूल भेजें। इनका ब्योरा भी पोर्टल पर सुरक्षित किया जाना है।