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सरकार की बेरुखी से संतों में नाराजगी

Thu, 19 Mar 2015 11:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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यमुना मुक्तिकरण अभियान के सहसंयोजक सुनील सिंह ने कहा कि इस धर्मसंसद में केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री उमाभारती के आने की बात थी, लेकिन मात्र उनका एक ई-मेल आया। इसमें कहा गया कि यमुना की अविरलता के लिए हम पांचों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक करने जा रहे हैं।
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निर्मलता के लिए भी अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही आपके पक्ष में फैसला होगा। अभियान के युवा राष्ट्रीय संयोजक अनुभव तैलंग ने बताया ये दुख की बात है कि सरकार को हमारी मांगों की ही जानकारी नहीं है।

हमारी प्रमुख मांग पर्यावरण अधिनियम के तहत नोटीफिकेशन जारी करना है, इससे सभी राज्य यमुना की अविरलता, निर्मलता बनाए रखने को बाध्य होंगे। साथ ही यमुना किनारे नाला बनाया जाए ताकि गंदा जल यमुना में न गिरे। सब जानते हुए भी सरकार अनजान बन रही है इससे संतों में नाराजगी है।
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झलकियां:

-भारतीय किसान यूनियन (भानु) के  राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने धर्म संसद शुरू होने से पहले कहा कि कोई भी नेता कुर्सी पर नहीं बैठेगा, क्योंकि नेता कभी संतों की बराबरी नहीं कर सकता। उनकी जगह संतों के चरणों में है।

-बदरपुर से आम आदमी पार्टी के विधायक नरेंद्र शर्मा यमुना मुक्तिकरण अभियान में अपना समर्थन देने पहुंचे।

-भीड़ बढ़ने से जाम लगते देख दिल्ली पुलिस ने सरिता विहार और बदरपुर बार्डर पर संतों और उनके साथ बसों में आ रहे भक्तों को रोकना शुरू किया। इस पर धर्म संसद से उन्हें चेतावनी दी गई। यहां मौजूद दिल्ली पुलिस के जवानों ने संदेश भेजकर स्थिति बताई तब जाकर लोगों को आने दिया गया।

-मानमंदिर गुरुकुल के छात्रों का समूह लोगों को भजनों, श्लोकों और अपनी वेशभूषा से आकर्षित कर रहा था। वे शंख भी बजा रहे थे। कई छात्रों ने भगवान कृष्ण का रूप धारण कर रखा था।
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-धर्म संसद में आए संतों को सुनने और दर्शन के लिए जब सड़क पर जगह नहीं मिली तो भक्त बसों पर चढ़ गए।

-एनएचपीसी से बदरपुर बार्डर तक हाईवे वन-वे रहा। दिल्ली से आगरा जाने वाले और आगरा से दिल्ली जाने वालों को बाईपास से निकाला गया।
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