वृंदावन। संत प्रेमानंद और एक महिला श्रद्धालु में हुए एक संवाद ने खाने-पीने की प्रवृत्ति पर लोगों के बीच नई चेतना जगा दी है।
लंदन से आईं एक श्रद्धालु ने संत प्रेमानंद महाराज से कहा कि महाराज, जब से मैं वृंदावन आई हूं, तब से फास्ट फूड, चाऊमीन, गोलगप्पे, सभी चीजें बहुत ज्यादा खा रही हूं। आपने तो कहा था कि इन चीजों से दूर रहना चाहिए। तो मैं अब क्या करूं? इस पर प्रेमानंद मुस्कराते हुए बोले, आपको अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना पड़ेगा। स्वाद के चक्कर में अपने स्वास्थ्य को न बिगड़ने दीजिए। घर में बना सात्विक भोजन कीजिए और बाहर के खाने के चक्कर में सिर्फ बचकर रहें।
यह संवाद भक्तों के बीच काफी चर्चा का विषय बन गया है। संत ने अपने शब्दों में सात्विक भोजन के महत्व को उजागर किया, जिसमें न केवल शरीर बल्कि मन की भी शुद्धता बनी रहे। उनका संदेश था कि आधुनिक जीवनशैली में जहां स्वाद और सुविधा की ओर झुकाव बढ़ा है, वहीं असली स्वास्थ्य के लिए घर का बना, पोषक तत्वों से भरपूर सात्विक भोजन सबसे उत्तम विकल्प है।