मशहूर गीतकार संतोष आनंद के पुत्र संकल्प आनंद और पुत्रवधू नरेश नंदिनी आनंद के आत्महत्या प्रकरण की जांच में मथुरा पुलिस को 40 सवालों का जवाब 19 दिन बाद भी नहीं मिल सका है। यह सवाल क्राइम ब्रांच ने एलएनजेपी इंस्टीट्यूट की निदेशक से पूछे थे। मथुरा क्राइम ब्रांच अब निदेशक से फोन पर हुई बात को विवेचना का हिस्सा बनाने जा रही है। बता दें कि पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश भी राज्य सरकार कर चुकी है।
15 अक्तूबर को संकल्प और नरेश नंदिनी ने कोसीकलां में मथुरा दिल्ली रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या कर ली थी। उनकी कार से मिले 10 पेज के सुइसाइड नोट में संकल्प को 250 करोड़ के घोटाले में फंसाने का आरोप लगाया था। यह घोटाला लोकनायक जयप्रकाश नारायण विधिविज्ञान अपराध शाखा संस्थान में होने की बात लिखी गई है। संकल्प भी इसी संस्थान में कार्यरत थे।
सुइसाइड नोट में यूपी पुलिस में आवास निगम के तत्कालीन डीजी कमलेंद्र प्रसाद और डीआईजी संदीप मित्तल सहित 38 लोग नामजद हैं। सभी के खिलाफ कोसीकलां थाने में रिपोर्ट दर्ज है। मामले की विवेचना कर रही मथुरा क्राइम ब्रांच ने 19 दिसंबर को दिल्ली के रोहिणी स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण विधिविज्ञान अपराध शाखा संस्थान की डीजी रीमा मित्रा को पत्र लिखा। इसमें संकल्प आनंद आत्महत्या प्रकरण में क्राइम नंबर 753/14 धारा 306 से संबंधित 40 सवाल उनसे पूछे गए।
डीजी रीमा ने सवालों का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था लेकिन 19 दिन बाद भी जबाव नहीं दिया है। विवेचकों की टीम दो बार दिल्ली जाकर भी जानकारी कर चुकी है। सीबीआई जांच से पहले अपने स्तर की कार्रवाई पूरी करने में जुटी मथुरा क्राइम ब्रांच एलएनजेपी इंस्टीट्यूट की डीजी से 40 सवालों के जवाब के लिए लगातार फोन कर प्रगति जान रही है। सूत्रों के अनुसार डीजी के पीए विजय कुमार फोन पर एक दो दिन की कहकर मामले को टाल रहे हैं। इसे लेकर विवेचकों की टीम डीजी कार्यालय को किए गए फोन कॉल्स की डिटेल को विवेचना का हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है।