मंगलवार को तड़के करीब चार बजे मंदिर में तप पर बैठे संजू पंडा ने अखंड ज्योति पर हाथ रखकर शीतलता महसूस की। हालांकि उस समय होलिका की लपटों ने चारों ओर खड़े श्रद्धालुओं को काफी पीछे धकेल दिया लेकिन ज्यों ही संजू पंडा प्रह्लाद की माला को धारण कर निकले भक्त प्रह्लाद के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। प्रहलाद कुंड में स्नान के बाद चार बजकर 15 मिनट पर संजू पंडा ने धधकती होलिका की ओर दौड़ लगा दी।
धधकती होली की लपटों के बीच जब संजू पंडा दिखाई दिए तो वहां सन्नाटा पसर गया। ऐसा लग रहा था कि माना कुछ पलों के लिए वहां मौजूद लोगों की सांसें थम गईं हो। जैसे ही संजू पंडा अंगारों पर चलते हुए सुरक्षित बाहर निकले, पूरा गांव भगवान श्रीकृष्ण और प्रहलाद के जयकारों से गूंज उठा। लोग इसे चमत्कार मान रहे थे।
होलिका के अंगारों पर 10 कदम रखकर पंडा होलिका से सकुशल बाहर निकले। मेला आचार्य पंडित भगवान सहाय एवं ग्रामीणों ने उन्हें अपनी गोद में भर लिया। चारों तरफ जय-जयकार के साथ गुलाल उड़ना शुरू हो गया। पंडा ने मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की। इस क्षण के हजारों श्रद्धालु गवाह बने।