एक युवक के हाथ पर बने ‘महादेव’ के टैटू को देखकर संत प्रेमानंद ने ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इन्हीं हाथों से शौचालय जाते हैं, नहाते वक्त उन्हीं हाथों पर पानी डालते हैं, ऐसे में भगवान के नाम या रूप पर जल गिराना या उन्हें अपवित्र करना कहीं न कहीं धर्म के खिलाफ है। इससे पुण्य कम होता है और यह आस्था का अपमान है।
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संत प्रेमानंद महाराज ने युवाओं से अपील की कि वे धार्मिक प्रतीकों और नामों का सम्मान करें और उन्हें इस तरह के टैटू के रूप में शरीर पर न बनवाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धा हृदय में होनी चाहिए, शरीर पर नहीं।