वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज ने नए साल को किस तरह मनाना चाहिए, इसके लिए लोगों को टिप्स दिए। उन्होंने मंगलवार को एकांतिक वार्तालाप में भक्तों को बताया कि नया वर्ष, नया जीवन होता है। इसमें अच्छे आचरण का नियम लेना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा नामजप करें, क्रोध नहीं करें। मन को भटकाव के बजाए भगवान में लगाएं।
उन्होंने कहा कि नए वर्ष पर लोगों को संकल्प लेना चाहिए कि वह आने वाले वर्ष में परोपकार करेंगे। कोई ऐसा पुण्य या दान करेंगे, जिससे भगवान प्रसन्न हों। उन्होंने वर्तमान समय में नए वर्ष के दौरान लोगों द्वारा किए जा रहे आचरण पर नाराजगी जताई और सचेत किया कि लोग उत्साह में शराब पीते हैं, मांस खाते हैं और व्यभिचार करते हैं, जो गलत है। नए वर्ष को मंगलमय बनाने के लिए नशा छोड़ने का नियम लेना चाहिए। जो गंदे आचरण अभी तक करते रहे उसे भी त्यागने का प्रण लेना चाहिए। संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि गंदा आचरण करने वालों काे समझना चाहिए कि पाप कर्म करने पर दुख मिलता है। मनुष्य का मदिरा पान करना पाप कर्म है। पाप कर्म करने से दुर्गति निश्चित है। कर्म बिगड़ने पर लोग पड़े-पड़े सड़ते हैं और फिर उन्हें कोई प्यार से पानी देना भी नहीं होता।
उन्होंने लोक व्यवहार के बारे में बताया कि जब व्यक्ति कमाता है तो चार के काम आता है, लेकिन उसके पड़े रहने पर वह उसे देखने भी नहीं आते हैं। यह संसार बड़ा ही स्वार्थी है, इसलिए भजन करो। पाप और मनमानी करने पर अनेक योनियों में अनेक प्रकार से दंड भोगने पड़ते हैं। यहां सिर्फ मनुष्य ही नहीं है। संसार में 83 लाख 99 हजार 999 योनियां हैं, जो कि पाप कर्म करने पर भोगनी पड़ती हैं।