वृंदावन। वात्सल्य ग्राम में आयोजित वात्सल्य महोत्सव में डॉ. उमाशंकर राही द्वारा रचित जीवन के रंग-दोहों के संग पुस्तक का विमोचन साध्वी ऋतंभरा द्वारा किया गया। कवि सम्मेलन का आयोजन भी हुआ।
वात्सल्य ग्राम के प्रवक्ता डॉ. उमाशंकर राही ने बताया कि जीवन के रंग-दोहों के संग पुस्तक की विशेषता है कि इसमें लिखे गए 360 दोहे एक कड़ी में बंधे हुए हैं। पहला दोहा जिस शब्द पर समाप्त होता है दूसरा दोहा उसी शब्द से प्रारंभ होता है। साहित्य जगत में यह संभवत: पहला प्रयोग है। इस पुस्तक को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा प्रकाशित किया गया है। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि राही द्वारा रचित पुस्तक समाज के लिए दिशा बोधक सिद्ध होगी। उन्होंने दोहों में नया प्रयोग किया है जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि उमाशंकर राही राष्ट्रीय चेतना के कवि हैं उनकी दो कृतियां सच्चे पातशाह एवं चमकौर का युद्ध पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं, यह उनकी तीसरी पुस्तक है।
डॉ. शोभा अग्रवाल चिलबिल ने कहा कि डॉक्टर राही द्वारा प्रकाशित पुस्तक मात्र पुस्तक नहीं है यह मानव जीवन की समग्रता है। इसमें जीवन के हर पक्ष की दिशा और दशा का रसमय वर्णन है। कवि मुकेश मालवा ने कहा पुस्तक ने साहित्य में अपना नया स्थान प्राप्त किया है। साध्वी सत्यप्रिया ने कहा कि पुस्तक नए कलेवर में आई है। साहित्य मनीषी डॉ. दिनेश पाठक शशि ने कहा जीवन के रंग दोनों के संग एक उत्कृष्ट दोहा संग्रह है। कवि देवी प्रसाद गौड़ ने कहा है कि कृति में नाना भाव रंगों से चित्रित दोहों का प्रयोग मुक्त छंदों के रूप में किया गया है। इस अवसर पर संजय भैया, अशोक सरीन, कवि विजय विद्रोही, आयुषी अखेजा, दिनेश पाटीदार, सुनील समर्थ, साध्वी समन्विता, स्वामी सत्यशील, स्वामी सत्यश्रवा, साध्वी शक्ति कीर्ति, साध्वी सत्यमूर्ति, साध्वी सत्यव्रता, मौजूद रहे।