जगरांव (पंजाब) के ऋषभ बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। क्रिकेट खेलने के साथ ही भजन गायिकी शुरू की तो कृष्ण भक्ति में मन रम गया। साथियों के साथ हर साल वृंदावन आते। दोस्तों से कहते कि मन करता है सब कुछ छोड़कर वृंदावन में ही बस जाऊं, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था, वृंदावन में बस तो नहीं सके मगर इसी माटी में प्राण त्याग दिए।