मथुरा। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की मथुरा रिफाइनरी और नगर निगम के बीच टैक्स प्रकरण की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नगर निगम टैक्स वसूली के लिए अपने स्तर से कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। हाईकोर्ट ने कहा है कि मथुरा रिफाइनरी दो माह के अंदर अपना पक्ष रख सकता है, इसके बाद नगर निगम अपने स्तर से टैक्सी वसूली की कार्रवाई करेगा।
नगर निगम का रिफाइनरी पर करीब 80 लाख रुपए बकाया चल रहा था, जिसके एवज में रिफाइनरी प्रबंधन से बार-बार पत्राचार कर धनराशि जमा करने की आग्रह किया गया। नोटिस निर्गत होने की तिथि निकल जाने के बाद नगर आयुक्त ने रिफाइनरी के स्टेट बैंक में खाते में टैक्स राशि को सीज करवा दिया था। इस विवाद को लेकर मथुरा रिफाइनरी प्रबंधन हाईकोर्ट गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि 15 दिन में रिफाइनरी प्रबंधन अपना प्रार्थना पत्र नगर निगम को देकर निस्तारण कराए और बकाया धनराशि को अविलंब जमा कर दे। ज्ञात रहे कि मथुरा रिफाइनरी प्रबंधन का कहना था कि हमारा संस्थान भारत सरकार के 243 एच आर्टिकल के मुताबिक सभी प्रकार के टैक्स से मुक्त है इसीलिए वह नगर निगम का टैक्स जमा नहीं करेंगे जबकि नगर निगम का कहना था कि यह आदेश केवल सेंट्रल टैक्स के लिए लागू है। स्टेट गवर्नमेंट या स्थानीय निकाय के नियमों पर लागू नहीं है। नगर निगम ने हाईकोर्ट में एक शासनादेश का हवाला देते हुए बताया कि लोकल बॉडी अपने सभी प्रकार के टैक्स वसूलने के लिए सक्षम है। हाईकोर्ट ने नगर निगम की इस बात को स्वीकार करते हुए मथुरा रिफाइनरी के खिलाफ आदेश जारी किया है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम का कहना है कि हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि नगर निगम रिफाइनरी से अपने स्तर से टैक्स की वसूली करने के लिए स्वतंत्र है। जवाब दाखिल करने के लिए रिफाइनरी को दो माह का समय दिया गया है।