वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को शीतलता प्रदान करने के लिए अक्षय तृतीया के अवसर मलयागिरि के लगभग 100 किलो चंदन से सेवा की जाएगी। इस दौरान ठा.बांकेबिहारी भक्तों को चरण दर्शन देेंगे, वहीं वृंदावन के अन्य मंदिरों में सर्वांग चंदन दर्शन होंगे। चरण दर्शन साल में एक ही बार होते हैं, ऐसे में इसका विशेष महत्व है। दक्षिण भारत से लाए गए मलयागिरि चंदन की घिसाई का कार्य इन दिनों सेवायत गोस्वामियों द्वारा किया जा रहा है।
अक्षय तृतीया के दिन ठा.बांकेबिहारी मंदिर में सेवायत गोस्वामी प्रभु को चंदन लेपन की सेवा कर गर्मी में ठंडक का अहसास कराएंगे। इसके लिए लगभग 125 गोस्वामी परिवार अपने घरों और मंदिरों में पत्थरों के सिला पर चंदन घिस रहे हैं। मंदिर के सेवायत प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि बांकेबिहारी सुबह के समय चरण दर्शन और शाम के समय सर्वांग दर्शन देंगे। सर्वप्रथम स्वामी हरिदासजी ने ठा.बांकेबिहारी का सर्वांग चंदन का शृंगार कर शीतलता दी। वर्ष में एक बार होने वाले इस दिव्य दर्शन के लिए लाखों भक्त वर्ष भर इंतजार करते हैं। इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए मंदिर के सेवायत गोस्वामी मलयागिरि चंदन एक माह पहले से ही सिलों पर घिसकर तैयारी में जुट जाते हैं। संवाद
वर्षभर रहता है इंतजार
मंदिर सेवायत ने बताया कि इस पर्व का मंदिर के गोेस्वामी और देश-विदेश के भक्तों को पूरे वर्ष इंतजार रहता है। दिव्य दर्शन के लिए तिथि से एक माह पूर्व ही सेवायत गोस्वामियों के घरों में मैसूर से मलयागिरि चंदन भक्तों के सहयोग से लाया जाता है। उसे सिला पर घिसकर तैयार करने का सिलसिला शुरू हो जाता है। अपने आराध्य को यह लेप मखमल के कपड़े से किया जाता है। प्रभु चरणों में कुछ समयांतराल में गोस्वामी चंदन का गोला बदलते रहते हैं। ताकि प्रभु चरणों में शीतला बरकरार रहे। मान्यता है कि इस गोले के प्रसाद रूप कण से भक्तों के असाध्य रोग दूर हो जाते हैं। प्रभु बांकेबिहारी के दिव्य चंदन दर्शन चारों धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री की यात्रा के समतुल्य है। इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
8 हजार रुपए प्रति किलो चंदन की घिसाई
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत अशोक गोस्वामी इस बार अक्षय तृतीया पर पांच किलो चंदन की लकड़ी की घिसाई गुलाब जल में करा रहे हैं। अब चंदन घिसाई कसाले का कार्य हो गया है। यही कारण है कि 8000 रुपए प्रति किलो चंदन घिसाई ली जा रही है। पांच किलो चंदन जब घिसकर तैयार हो जाएगा तो उसमें 150 ग्राम केसर, 1.5 किलो कर्पूर मिलाया जाएगा। ठाकुरजी के लिए दस किलो चंदन बनकर 9 मई को तैयार हो जाएगा।