वृंदावन। केसी घाट के निकट पांटून पुल के समीप दो माह पहले हुए यमुना में हुए नाव हादसे को लेकर केंद्र सरकार गंभीर है। सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की एक उच्चस्तरीय छह सदस्यीय जांच टीम सोमवार को वृंदावन पहुंची। टीम ने घटना स्थल पर विभिन्न पहलुओं की बेहद बारीकी से जांच पड़ताल की। घटना का सीन रिक्रिएशन कर देखा। टीम में शामिल अधिकारियों के सवालों के आगे नगर निगम के अधिकारी नतमस्तक नजर आए।
सोमवार सुबह एनडीएमए की छह सदस्यीय टीम में शामिल सेवानिवृत कमांडेंट आदित्य कुमार के साथ जांच दल ने सबसे पहले केसी घाट के समीप पांटून पुल पर पहुंची। टीम के सदस्य खुद मोटरबोट में सवार हुए और यमुना नदी का व्यापक दौरा किया और घटना के वृंदावन की घटना से सीख लेते हुए देशभर की नदियों में यात्री सुरक्षा को लेकर योजना बनाई जाएगी। सीन रिक्रिएशन कर घटना का सही कारण जानने का प्रयास किया। अधिकारियों ने नदी में पानी के बहाव की गति और उस जगह की गहराई को बारीकी से समझा। इसके बाद टीम ने उन स्थानीय गोताखोरों को मौके पर बुलाया, जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर हादसे के वक्त डूबते हुए लोगों को बचाने का प्रयास किया था। टीम ने गोताखोरों से आमने-सामने बातचीत की और हादसे के समय की वास्तविक स्थिति को जाना।
गोताखोरों से यह भी पूछा गया कि प्रशासन की तरफ से राहत और बचाव कार्य में क्या कमियां थीं और अगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते तो क्या इन लोगों की जान को बचाया जा सकता था। घटना स्थल को देखने के साथ ही वहां घटना के प्रत्यक्षदर्शी नाविक भूप सिंह से पूरा वाकया जाना। नाविक ने बताया कि 10 अप्रेल दोपहर लगभग तीन बजे पांटून पुल जोड़ने का कार्य चल रहा था। नदी में पानी कम होने पर यात्रियों से भरी नाव का पंखा फंस गया। तेज हवा में नाव आगे बढ़ी तो वह पांटून से टकरा गई और पलट गई। इसमें पंजाब के 16 यात्रियों की मौत हो गई। टीम ने नदी में डूबी नाव की स्थिति की स्थिति को जाना। नाविकों से सवाल किया कि नाव कहां बनती हैं। इनकी फिटनेस कौन देखता है। टीम के साथ मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने बताया कि छह सदस्यीय टीम जांच करने आई है। यह टीम दो दिन यहां जांच पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को प्रस्तुत करेगी।
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एनडीएमए के सवालों का जवाब नहीं दे पाए निगम अधिकारी
जांच के दौरान केंद्रीय टीम का रुख बेहद सख्त रहा। टीम ने नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए सवालों की झड़ी लगा दी। टीम ने अपर नगर आयुक्त से सवाल किया कि नदी में नाव संचालन क्षेत्र कितना है। प्रतिबंधित क्षेत्र कहां है। जब यमुना का वह विशेष क्षेत्र नावों के संचालन के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित घोषित था तो वहां नाव कैसे पहुंची और उसका संचालन कैसे हो रहा था? नाव संचालन क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्र का नदी किनारे नक्शा क्यों नहीं है। यहां नाव संचालन का नोटिस बोर्ड क्यों नहीं है। नाव के सुरक्षा के इंतजाम को क्या कदम उठाए गए, क्या नाव में एंकर हैं, क्या नाव में टोइंग हुक है, जिससे नाव डूबने पर उसे बाहर निकाला जा सके। इन सवालों के जवाब नगर निगम के अधिकारियों के पास नहीं मिले। अपर नगर आयुक्त सीपी पाठक एवं सीटीओ नाव में यात्रियों की निर्धारित संख्या भी नहीं बता पाए। नाव में उसकी तय क्षमता से कई गुना अधिक श्रद्धालुओं को क्यों बैठाया गया? इस जानलेवा ओवरलोडिंग पर नजर रखने के लिए मौके पर नगर निगम या पुलिस का कोई जिम्मेदार कर्मचारी क्यों तैनात नहीं था?
यह भी किए सवाल तो निरुत्तर हुए अधिकारी
नाव में सवार मासूम श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट (सुरक्षा जैकेट) क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई थीं?, किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नावों में एंकर (लंगर) की व्यवस्था क्यों नहीं थी?, यमुना घाट पर आने वाले बाहरी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें जागरूक करने के लिए प्रशासन द्वारा कोई चेतावनी बोर्ड या क्षेत्र का मानचित्र (नक्शा) क्यों नहीं लगाया गया था? केंद्रीय टीम के इन तार्किक और चुभते सवालों के सामने स्थानीय अधिकारी बगलें झांकते नजर आए और उनके पास कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं था।
अस्पतालों का दौरा कर घायलों और मृतकों के रिकॉर्ड खंगाले
केसी घाट पर अपनी स्थलीय जांच और निरीक्षण पूरा करने के बाद एनडीए की टीम सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मांट पहुंची। यहां अधिकारियों ने हादसे के ठीक बाद अस्पताल लाए गए घायलों के इलाज की व्यवस्था, मेडिकल सुविधाओं और मृतकों के शवों के पंचनामा व पोस्टमार्टम के संबंध में विस्तृत जानकारी हासिल की। इसके बाद टीम वृंदावन स्थित सौ शैया अस्पताल भी गई और अस्पताल प्रबंधन से घायलों की मेडिकल हिस्ट्री और उनके बयानों के संबंध में दस्तावेज हासिल किए।
दोषियों पर कार्रवाई होनी तय
एनडीएमए की इस प्रारंभिक जांच में यह साफ तौर पर देखा गया कि स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण ही यह इतना बड़ा और दर्दनाक हादसा हुआ। सुरक्षा के सभी तय नियमों और मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर प्रतिबंधित क्षेत्र में नावों का व्यावसायिक संचालन किया जा रहा था। प्रशासन की इसी अनदेखी की भारी कीमत पंजाब के लुधियाना से आए 16 निर्दोष श्रद्धालुओं को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। सूत्रों के अनुसार एनडीएमए की यह टीम जल्द ही अपनी इस बेहद गोपनीय और विस्तृत जांच रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों और दोषियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
मौके पर मौजूद रहे स्थानीय अधिकारी
केंद्रीय टीम के इस निरीक्षण के दौरान जिले के अधिकारी मौके पर मुस्तैद रहे। इनमें मुख्य रूप से एडीएम वित्त पंकज वर्मा, एसपीआरए सुरेश चंद्र, सीएफओ अरुण कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त सीपी पाठक, सीएमओ डॉक्टर राधाबल्लभ, एसडीएम दीपिका मेहेर, सीओ यातायात संदीप कुमार सिंह, तहसीलदार गोवर्धन बृजेश कुमार सिंह, पर्यटन विभाग प्रशासन के निदेशक पुष्प कुमार आदि उपस्थित रहे।