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रास को समझना साधारण विषय नहीं हैं

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वृंदावन। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में सांझी कलाकारों का सम्मान एवं पुस्तकों का विमोचन किया गया।
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गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के सभागार में आयोजित समारोह में भागवताचार्य डॉ. अच्युतलाल भट्ट ने कहा कि रास को समझना साधारण विषय नहीं हैं। यह वस्तुत: गोपियों के प्रेम का उत्सव है। गोविंद कृष्ण पाठक एवं गंगाधर पाठक ने रास के मंच को सतत बनाए रखने पर बल दिया। कवि अशोक अज्ञ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अध्यक्षता स्वामी महेशानंद सरस्वती ने की। मुख्य अतिथि जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप, डॉ. अच्युतलाल भट्ट एवं स्वामी महेशानंद ने लेखक कपिल देव उपाध्याय की पुस्तक रास का क्रमिक विकास एवं लेखिका डॉ. अनीता चौधरी की पुस्तक मन उपवन की तुलसी का लोकार्पण किया।
लेखक कपिलदेव उपाध्याय ने कहा कि रासलीला के प्रति समय रहते हम सचेष्ट नहीं हुए तो निश्चित रूप से इस माधुर्य भाव की परंपरा का निर्वहन संभव नहीं होगा। रासलीला रंगमंच से विलुप्त होने से बचानी है। डॉ. अनीता चौधरी ने अपनी पुस्तक मन उपवन की तुलसी में भावनाओं को काव्य के रूप में व्यक्त किया है। वृंदावन टुडे के अंक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी, प्रकाशन अधिकारी गोपाल शरण शर्मा, चित्रकार कमलेश्वर शर्मा, विश्वजीत दास, संजय सोनी, भावना शर्मा, गीता शोध संस्थान के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, मुकेश शर्मा, दूधनाथ यादव, तुलसी स्वामी, जगन्नाथ पोद्दार, डॉ. एसपी गोस्वामी, भारती शर्मा मौजूद रहे।
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