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अब ब्रज की शोभा हैं झांसी की रानी की वीरगाथाएं

Sat, 19 Nov 2016 12:39 AM IST
अमर उजाला वृंदावन
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अंग्रेज अफसरों द्वारा लिखे गए पत्र - फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नारी शक्ति का पर्याय बनीं रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथाएं ब्रज में संरक्षित हैं। अंग्रेज अफसरों की ओर से भारतीय राजाओं को भेजे गए पत्र में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रानी की हर गतिविधि की जानकारी दी गई थी। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान में इन्हीं पत्रों को मूल रूप में संरक्षित कर रखा गया है। इसमें रानी की मृत्यु तक कई रोचक किस्से आज भी उस दौर की यादों को ताजा कर देते हैं। 
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ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी बताते हैं कि संस्थान के ग्रंथागार में क्रम संख्या 739 पर संरक्षित राजाओं को भेजे जाने वाला स्वर्ण बरक का पत्र है। यह ब्रिटिश अधिकारी हेमिंग्टन ने अपने खासकलम (सुलेखक) से तैयार कराकर रतलाम के राजा भैरो सिंह को भेजा था। इसमें रानी की मृत्यु की सूचना भेजने का उल्लेख है। एक पत्र में नाना साहब पेशवा पर दस हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की सूचना अंकित है। पत्र पर हेमिंग्टन के हस्ताक्षर भी हैं।  

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेज अधिकारी रानी लक्ष्मीबाई के पराक्रम से बुरी तरह बौखलाए थे। रानी के विरुद्ध सैन्य अभियान चलाने वाले ब्रिटिश अधिकारी ह्यूरोज ने भी अपनी रिपोर्टों में रानी के खिलाफ चलाए गए अभियानों का उल्लेख किया है।  
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वृंदावन शोध संस्थान के शोध अध्येता और विश्वकोश के सह संपादक डा. राजेश शर्मा बताते हैं कि मध्य भारत में ब्रिटिश अधिकारी राबर्ट हेमिंग्टन रानी से जुड़ीं सूचनाएं अपने उच्चाधिकारियों को भेजने के साथ अन्य रियासतों को ब्रिटिश शासन के पक्ष में लेने के लिए पत्राचार करता था। रियासतों राजा अंग्रेजी से अनभिज्ञ थे इसलिए हेमिंग्टन ने अपने कार्यालय में सुलेखक रखे थे, जो खासकलम कहलाते थे। उनसे बुंदेली भाषा में पत्र तैयार कराकर हेमिंग्टन अपने हस्ताक्षरों से प्रमाणित करता था।

रानी के वीरगति प्राप्त होने पर उसने राजाओं को इस सूचना के पत्र इस आशय से भेजे थे कि अधिक से अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुंच जाय ताकि संग्राम को शीघ्रता से शांत करा जा सके। हेमिंग्टन के एक पत्र में रानी के अंतिम संस्कार का उल्लेख भी है।

डा. राजेश शर्मा बताते हैं कि रॉबर्ट हेमिंग्टन सन 1844 से 1856 तक होल्कर रियासत में रेजीडेंट रहा। इसके बाद वह मध्य भारत का अफसर बना। भारतीय रियासतों को ब्रिटिश हुकूमत में शामिल करने के लिए उसने मुहिम चलाई हुई थी। हेमिंग्टन के कुछ पत्र राष्ट्रीय अभिलेखागार में भी हैं। हेमिंग्टन और ह्यूग रोज की तत्कालीन रिपोर्ट इसका उल्लेख करती हैं।
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