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फिर त्रेता की घड़ी आई, कल प्रगट होंगे रघुराई

Thu, 26 Mar 2015 11:56 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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समाज में पुरुष के हर रूप के लिए मर्यादा का सर्वोत्तम चरित्र प्रस्तुत करने वाले दशरथ नंदन भगवान राम का जन्मोत्सव 28 मार्च को मनाया जाएगा। यूं तो चैत्र मास की नवमी तिथि को हर साल रामनवमी के रूप में यह आयोजन होता है लेकिन इस बार कुछ खास है। भगवान श्रीराम इस बार  पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म ले रहे हैं, यह वही नक्षत्र है जिसमें प्रभु श्रीराम ने त्रेता युग में जन्म लिया था।  ज्योतिषाचार्य इसे अद्भुत संयोग मान रहे हैं।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने त्रेता युग में श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया था। उनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ के घर हुआ। हिंदू धर्म में उन्हें पुरुष के हर रूप के लिए आदर्श माना जाता है। हर साल चैत्र मास की नवमी को सभी भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस बार यह आयोजन 28 मार्च को है। श्रीराधा गोविंद देव पंचांग के संपादक और ज्योतिषाचार्य कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी के अनुसार महर्षि वाल्मीकि ने भगवान राम की जो जन्म पत्रिका तैयार की है उसमें प्रभु का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में दर्शाया गया है। उनकी कुंडली में कर्क लग्न में बृहस्पति, कन्या राशि में राहु और मीन राशि में केतु की मौजूदगी दिखाई गई है। 28 मार्च को सुबह 4 बजकर 05 मिनट से 29 मार्च को सुबह छह बजकर 8 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र है। इसके साथ ही प्रभु श्रीराम की कुंडली मौजूद अन्य ग्रह-नक्षत्रों का भी अद्भुत संयोग है।


धर्म सिंधु, अगस्त संहिता में उल्लेख
धर्म पुस्तक धर्मसिंधु और ऋषि अगस्त द्वारा रचित अगस्त संहिता में मध्यान्ह में पुनर्वसु नक्षत्र को बेहद प्रभावशाली बताया गया है। इनमें उल्लेख है कि रामनवमी को भगवान श्रीराम की प्रतिमा की पूजा-अर्चना, व्रत करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं।
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