मथुरा। द्वारिकाधीश मंदिर में राजाधिराज के दर्शन करते भक्त।
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मथुरा। रविवार रात को लगे चंद्रग्रहण ने मथुरा-वृंदावन के धार्मिक माहौल को प्रभावित किया। दोपहर 12 बजे से ही शहर के अधिकांश मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। श्रद्धालु जो सुबह से ही दर्शन के लिए पहुंचे थे, उन्हें केवल दोपहर तक ही भगवान के दर्शन का सौभाग्य मिल सका। केवल द्वारिकाधीश मंदिर में राजाधिराज ने ग्रहण काल के दौरान भी भक्तों को दर्शन दिए।
सबसे ज्यादा असर वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दिखाई दिया। दोपहर बाद दोनों मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और श्रद्धालुओं से परिसर खाली करा दिया गया। शाम को जब बड़ी संख्या में भक्त बांकेबिहारी के दर्शन के लिए पहुंचे, तो उन्हें निराशा हाथ लगी। हालांकि भक्तों ने बाहर भजन-कीर्तन और संकीर्तन करके अपनी आस्था व्यक्त की। दूसरी ओर, मथुरा का प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर परंपरा के अनुसार चंद्रग्रहण के समय भी खुला रहा। यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। भक्तों ने ग्रहण काल में भजन, ध्यान और दान-पुण्य में समय बिताया।
ज्योतिषाचार्य कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि रात 9.57 से 1.27 बजे तक ग्रहण रहेगा। इसका सूतक रविवार को दोपहर 12.57 बजे लग गया था। ग्रहण के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए अन्न-जल ग्रहण नहीं किया। ग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण प्रक्रिया की जाएगी और और विशेष मंगला आरती के साथ भगवान का भोग लगाया जाएगा। कॉलोनियों में बने मंदिर परिसरों में भी लोग भजन और कीर्तन करते रहे।